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साबरकांठा में मिड-डे मील का डर: हसनपुरा स्कूल में फूड पॉइज़निंग के बाद 36 मासूम बच्चे हॉस्पिटल में भर्ती, खाने में छिपकली होने का डर!

इदर/साबरकांठा (रिपोर्टर: ज़ाकिर मेमन): साबरकांठा ज़िले के इदर तालुका के हसनपुरा प्राइमरी स्कूल से एक बहुत ही चिंताजनक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। स्कूल में परोसे गए मिड-डे मील के बाद 36 मासूम बच्चे अचानक गंभीर फूड पॉइज़निंग से बीमार पड़ गए, जिससे पूरे इदर ज़िले में बहुत ज़्यादा डर और दहशत फैल गई। खाना खाने के कुछ देर बाद ही बच्चों ने उल्टी, जी मिचलाना और पेट में असहनीय दर्द की शिकायत की, और सभी प्रभावित बच्चों को इदर सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

“खाने में छिपकली होने का शक!” – 36 बच्चे सिविल हॉस्पिटल में भर्ती

इदर सिविल हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट के मुताबिक, हसनपुरा स्कूल के 36 बच्चों को फूड पॉइज़निंग के कारण तुरंत हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है और मेडिकल टीम उनका इंटेंसिव ट्रीटमेंट कर रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बच्चों को परोसे गए मिड-डे मील में छिपकली गिरने का गंभीर शक जताया जा रहा है। ज़हरीला खाना पेट में जाते ही मासूम बच्चों की तबीयत एक के बाद एक बिगड़ने लगी। घटना की खबर मिलते ही माता-पिता और स्थानीय अधिकारियों का काफिला अपने प्यारे बच्चों की चिंता में अस्पताल पहुंच गया। मासूमों की जान से खेलने वालों के खिलाफ गुस्सा सरकार की तरफ से गरीब और आम बच्चों के लिए चलाई जा रही मिड-डे मील स्कीम में साफ-सफाई और क्वालिटी की कमी के कारण अक्सर ऐसी घटनाएं सामने आती हैं। लापरवाह प्रशासन से सवाल: किचन में खाना बनाते और परोसते समय साफ-सफाई का ध्यान क्यों नहीं रखा जाता? सुपरविजन कहां होता है? बच्चों को खाना परोसने से पहले उसकी क्वालिटी चेक करने के लिए जिम्मेदार टीचर या एडमिनिस्ट्रेटर क्या सो रहे थे? माता-पिता का गुस्सा: जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई हो! अपने बच्चों को अस्पताल के बेड पर इलाज कराते देख माता-पिता में काफी गुस्सा देखा जा रहा है। पेरेंट्स की साफ़ मांग है कि:

  1. एडमिनिस्ट्रेटर्स के ख़िलाफ़ FIR: मिड-डे मील बनाने और परोसने वाली एजेंसी और कॉन्ट्रैक्टर के ख़िलाफ़ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए।
  2. सैंपलिंग और टेस्टिंग: स्कूल में बनने वाले खाने के सैंपल लेकर लैब में टेस्ट के लिए भेजे जाएं।
  3. सख़्त सज़ा: मासूम बच्चों की सेहत और जान से खेलने वालों को कानूनी पिंजरे में डाला जाए।

इदर सिविल हॉस्पिटल के डॉक्टर अभी बच्चों की हालत पर लगातार नज़र रख रहे हैं। लेकिन इस घटना ने पूरे राज्य के एजुकेशन और हेल्थ सिस्टम के ख़िलाफ़ खतरे की घंटी बजा दी है।

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