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अहमदाबाद में सिक्योरिटी के नाम पर दरिंदा बना गार्ड ‘हाफ एनकाउंटर’ में पकड़ा गया: माफी नहीं, फांसी ही एकमात्र उपाय है!

अहमदाबाद (पवन माकन): जब सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाला गार्ड ही दरिंदा बन जाए, तो समाज का भरोसा हिल जाता है। अहमदाबाद शहर में सिक्योरिटी गार्ड की ड्यूटी पर तैनात एक अपराधी ने एक जवान लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाकर पूरे शहर को शर्मसार कर दिया है। पुलिस ने घटना के बाद भागने की कोशिश कर रहे इस अपराधी के पैर में गोली मारकर उसे गिरफ्तार कर लिया है।
गंभीर अपराध करने के बाद अस्पताल के बिस्तर से रहम की भीख मांगते हुए ‘एक बार माफ कर दो’ कहने वाले इस अपराधी के खिलाफ पूरे समाज में, छोटे-बड़े, सभी में भारी गुस्सा है।

‘हाफ एनकाउंटर’ से डर तो लगता है, लेकिन न्याय कब मिलेगा?

अहमदाबाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अपराध करके भागने की कोशिश कर रहे आरोपी के पैर में गोली (हाफ एनकाउंटर) मार दी, जिससे वह गिरफ्तार हो गया। पुलिस की इस तारीफ़ के काबिल और सख़्त कार्रवाई से असामाजिक तत्वों में ज़रूर डर पैदा हुआ है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे मानसिक रूप से विक्षिप्त अपराधियों पर कब तक रहम दिखाया जाएगा?

माफ़ी नहीं, तुरंत फांसी समाज के लिए एक मिसाल बनेगी

घटना के बाद माफ़ी मांग रहे आरोपियों के ख़िलाफ़ जनता की एक ही आवाज़ है: ऐसे अपराधियों के लिए समाज या कानून में माफ़ी की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई: इस मामले की रोज़ाना सुनवाई करके आरोपियों को जल्द से जल्द फांसी दी जानी चाहिए।
ऐसी सख़्त सज़ा: जब ऐसे अपराधियों को सबके सामने या बहुत जल्दी सज़ा मिलेगी, तभी समाज में एक मज़बूत और साफ़ मैसेज जाएगा कि महिलाओं की इज़्ज़त के साथ खिलवाड़ करने वालों का नतीजा सिर्फ़ मौत है।
ऐसी घटना दोबारा होने का डर: अगर कानूनी प्रक्रिया सालों तक खिंची, तो अपराधियों का डर खत्म हो जाएगा।

सरकार और कानूनी सिस्टम के सामने ज्वलंत सवाल:

  1. सुरक्षा एजेंसियों का पुलिस वेरिफ़िकेशन क्यों नहीं?: जिन गार्ड्स पर महिलाएं या लड़कियां सुरक्षित महसूस करती हैं, उनका बैकग्राउंड चेक करने में एजेंसियां ​​लापरवाही क्यों करती हैं? 2. कानून में बड़े सुधार की ज़रूरत: महिलाओं के खिलाफ गंभीर यौन अपराधों के लिए ट्रायल और सज़ा का समय तय करने के लिए कानूनी ढांचे में कड़े सुधार कब किए जाएंगे?
    अहमदाबाद की इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद, अब सिर्फ़ कागज़ पर कानूनी लड़ाई की नहीं, बल्कि ऐसे मिसाल देने वाले फैसले की ज़रूरत है, ताकि भविष्य में कोई भी बेईमान इंसान ऐसा घिनौना अपराध करने के बारे में सोचकर ही कांप जाए।
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