देश को ‘विश्व गुरु’ बनाने के दावों के बीच, अब सरकारी सिस्टम की प्राथमिकताओं पर तीखे सवाल उठ रहे हैं। हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, प्रधानमंत्री के विदेश दौरों और उनके इस्तेमाल के लिए खरीदे गए बोइंग VVIP एयरक्राफ्ट पर करोड़ों रुपये बर्बाद हुए हैं। लेकिन दूसरी तरफ, जिन स्कूलों में देश का भविष्य बन रहा है, वे सरकारी स्कूलों के बच्चों की बेसिक समस्याओं को हल करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
571 करोड़ के दौरे और 8,000 करोड़ के एयरक्राफ्ट: प्रधानमंत्री की शान पर करोड़ों खर्च
हाल ही में संसद में पेश किए गए ब्यौरे के मुताबिक, आंकड़े सामने आए हैं कि प्रधानमंत्री के विदेश दौरों पर 571 करोड़ रुपये से ज़्यादा खर्च हुए हैं। इसके अलावा, देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री की सुरक्षा और यात्रा के लिए लगभग 8,400 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कीमत पर लेटेस्ट ‘एयर इंडिया वन’ बोइंग 777-300ER (बोइंग 777) एयरक्राफ्ट खरीदे गए हैं।
दूसरी तरफ, देश के मासूम बच्चों की कड़वी सच्चाई
जब सिस्टम प्रधानमंत्री की यात्राओं और VIP सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये आसानी से मंज़ूर कर देता है, तो सरकारी स्कूलों की दयनीय हालत देखकर देश के लोगों में बहुत गुस्सा है:
खराब मिड-डे मील: देश के कई सरकारी स्कूलों में गरीब और आम परिवारों के बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील में खराब क्वालिटी, गंदगी और सही पोषण न मिलने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
जान जोखिम में पढ़ाई: ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में आज भी बच्चों को सड़कों या नदियों पर पुल न होने की वजह से जान जोखिम में डालकर नदी-नाले तैरकर पार करने पड़ते हैं या थर्मोकोल राफ्ट पर बैठकर स्कूल जाना पड़ता है। जनता का ज्वलंत सवाल: क्या यही ‘विश्वगुरु’ भारत का मॉडल है?
जब देश का आम नागरिक महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहा है, और स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों को सुरक्षित सड़क या पौष्टिक खाना भी नहीं मिल रहा है, तो करोड़ों रुपये के मॉडर्न प्लेन और विदेश यात्राएं शासकों की प्राथमिकता क्यों बन जाती हैं? जनता अब सीधा जवाब मांग रही है कि अगर देश के पास अपने प्रधानमंत्री की शान-शौकत के लिए करोड़ों रुपये हैं, तो गरीब बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए फंड की कमी क्यों है?
प्रसाद या प्रेस कॉन्फ्रेंस? सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिए
लोकतंत्र में जनता के टैक्स के हर रुपये का हिसाब देना सरकार का नैतिक कर्तव्य है। देश की जनता और विपक्षी पार्टियां मांग कर रही हैं कि प्रधानमंत्री खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करें और देश के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के खिलाफ उठाए गए इन गंभीर सवालों का जवाब दें।

