प्री-मॉनसून काम और सड़क मरम्मत के दावे हवा हो गए: AMC का कागज़ पर 4,124 शिकायतें बंद करने का दावा कितना सच है?
मॉनसून की शुरुआती बारिश ने ‘स्मार्ट सिटी’ अहमदाबाद की सड़कों के दरवाज़े खोल दिए हैं। पूरे शहर में फैले छोटे-बड़े भयानक गड्ढों की वजह से गाड़ी चलाने वालों को परेशानी हो रही है और हर दिन एक्सीडेंट का खतरा बढ़ रहा है। 15 जुलाई से सिर्फ़ 25 दिनों में, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के कंट्रोल रूम में गड्ढों और सड़क धंसने की 5,015 शिकायतों की बाढ़ आ गई है। हर दिन करोड़ों रुपये टैक्स देने वाले नागरिक म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन सिस्टम के भ्रष्ट और बेकार मैनेजमेंट के खिलाफ़ अपना गुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं।
ज़ोन के हिसाब से शिकायतों का हिसाब: कहाँ, कितने धमाके?
अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) की किताबों में दर्ज आंकड़े बताते हैं कि शहर कितना बुरा हो गया है:
- वेस्ट ज़ोन: 861 शिकायतें दर्ज हुईं, 734 बंद हुईं – सबसे बुरी हालत
- साउथ ज़ोन: 854 शिकायतें दर्ज हुईं, 688 बंद हुईं – शिकायतों की दूसरी सबसे ज़्यादा संख्या
- सेंट्रल ज़ोन: 788 शिकायतें दर्ज हुईं, 621 बंद हुईं – पुराने शहर की सड़कें बह गईं
- नॉर्थ ज़ोन: 786 शिकायतें दर्ज हुईं, 637 बंद हुईं – कीचड़ और गड्ढों का साम्राज्य
- नॉर्थ-वेस्ट ज़ोन (NW ज़ोन): 652 शिकायतें दर्ज हुईं, 527 बंद हुईं – ट्रैफिक जाम की एक बड़ी समस्या
- ईस्ट ज़ोन: 618 शिकायतें दर्ज हुईं, 538 बंद हुईं – सड़कों की खराब क्वालिटी
- साउथ-वेस्ट ज़ोन: 445 शिकायतें दर्ज हुईं, 378 बंद हुईं – तुलना में कम शिकायतें
कुल आंकड़ा: 5,015 शिकायतें दर्ज हुईं, 4,124 बंद हुईं। अभी 349 जगहों पर काम पेंडिंग है और 241 जगहों पर रिपेयर का काम चल रहा है।
4,124 शिकायतों को ‘क्लोज’ करने का दावा कितना खोखला है?
नगर निगम प्रशासन अपना बचाव करते हुए कह रहा है कि 5,015 शिकायतों में से 4,124 का निपटारा करके उन्हें बंद कर दिया गया है। लेकिन अगर आप सड़क पर निकलेंगे तो तस्वीर बिल्कुल अलग है। लोगों का आरोप है कि अधिकारी सिर्फ कागजों पर काम दिखाने के लिए शिकायतें बंद कर देते हैं। वे सिर्फ कचरा या मिट्टी डालकर गड्ढों को भरने का दिखावा करते हैं, जो बारिश के पानी से पहले ही बह जाता है। अभी भी 349 जगहों पर काम पेंडिंग है और 241 जगहों पर धीमी गति से रिपेयर का काम चल रहा है, जिससे ट्रैफिक की गंभीर समस्या पैदा हो रही है।
भ्रष्टाचार का ‘रोडमैप’ और विपक्ष का हमला
हर साल प्री-मानसून कामों, सड़कों की मरम्मत और पैचवर्क पर करोड़ों रुपये का बजट खर्च होता है। लेकिन, वे नॉर्मल बारिश में भी सड़कों के बह जाने के लिए ठेकेदारों, इंजीनियरों और नेताओं की मिलीभगत पर उंगली उठाते हैं। विपक्ष ने कड़ा हमला करते हुए कहा है, “म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन की बनाई सड़कें गारंटी पीरियड खत्म होने से पहले ही टूट जाती हैं। जनता के टैक्स का करोड़ों का पैसा सीधे कॉन्ट्रैक्टर की जेब में जा रहा है। आज म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन के सड़क बनाने वाले डिपार्टमेंट में फैले करप्शन की वजह से अहमदाबाद के लोग जान जोखिम में डालकर गाड़ी चलाने को मजबूर हैं।”
‘महानगर मेट्रो ’ के म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन पर मंडरा रहे सवाल:
- अगर प्री-मॉनसून काम के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, तो सिर्फ 25 दिनों में 5,000 गड्ढे क्यों हो गए?
- खराब क्वालिटी की सड़कें बनाने वाले कॉन्ट्रैक्टर को ब्लैकलिस्ट करके सख्त एक्शन कब लिया जाएगा?
- जिन 4,124 शिकायतों को बंद करने का दावा किया गया है, उनकी क्वालिटी चेक करने के लिए कोई इंडिपेंडेंट टीम क्यों नहीं बनाई जा रही है?
- गड्ढों की वजह से होने वाले एक्सीडेंट और लोगों को हुए फिजिकल और फाइनेंशियल नुकसान की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?

