Homeभारतगुजरातसूरत के स्कूल या सरकारी नीतियों की गूंज? जहां देश का भविष्य...

सूरत के स्कूल या सरकारी नीतियों की गूंज? जहां देश का भविष्य बन रहा है, क्या वह रिस्क का खेल है, पढ़ाई की जगह है या आसमानी ‘व्यवहार’ का सेंटर है?

सूरत, जिसे हम आर्थिक राजधानी और स्मार्ट सिटी के नाम से जानते हैं, वहां एक ऐसी डरावनी सच्चाई सामने आई है जो शिक्षा जगत को शर्मसार कर रही है और बच्चों के भविष्य पर काला धब्बा लगा रही है।

देश का भविष्य टूटी-फूटी दीवारों के बीच कैद

सूरत का एक स्कूल इतनी दयनीय और खतरनाक हालत में मिला है कि कोई भी माता-पिता इसे देखकर चौंक जाएंगे। जिन स्कूलों के क्लासरूम में देश का भविष्य बनना चाहिए, वहां मासूम बच्चे बेहद असुरक्षित, गंदे और डरावने माहौल में पढ़ने को मजबूर हैं। तो सवाल उठता है कि क्या देश का भविष्य इसी तरह तैयार होगा?

शिक्षा विभाग की रहस्यमयी चुप्पी और वसूली का खेल

सबसे बड़ा और परेशान करने वाला सवाल यह उठता है कि शिक्षा विभाग के AC कमरे में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को आज तक यह अराजक शहर क्यों नहीं दिखा? क्या एजुकेशन अधिकारी सिर्फ़ कागज़ पर स्कूलों का ‘इंस्पेक्शन’ करते हैं? ऐसे स्कूल को चलाने के लिए अब तक कितने गैर-कानूनी ‘व्यवहार’ और वसूली के खेल खेले गए हैं, जहाँ बच्चों के लिए बेसिक सुविधाओं की कमी है, सुरक्षित या साफ़ माहौल नहीं है? क्या स्कूल के ट्रस्टी, जो माता-पिता की मेहनत की कमाई से मोटी फीस वसूलते हैं, सिर्फ़ अपनी जेब भरने में लगे हैं?

एजुकेशन का मतलब सिर्फ़ किताबें, सुविधाएँ और बच्चों की सुरक्षा नहीं है।

एजुकेशन का मतलब सिर्फ़ किताबों के पन्ने पलटना या एग्जाम देना नहीं है। बच्चों को सुरक्षित, साफ़ और अच्छा माहौल देना भी उतना ही ज़रूरी है। बच्चों की सेहत और सुरक्षा के साथ इस खुलेआम छेड़छाड़ के सामने चुप रहना अब जुर्म है।

इसकी ज़िम्मेदारी किसकी है?

अगर आज कोई बड़ा हादसा होता है या किसी मासूम बच्चे की जान खतरे में पड़ती है, तो इसकी ज़िम्मेदारी किसकी है?

सरकार की? जो एजुकेशन को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है?

अधिकारी? जो सब कुछ जानते हुए भी आँखें बंद करके बैठे हैं?

या स्कूल एडमिनिस्ट्रेटर की? जो एजुकेशन को सिर्फ़ कमाई का ज़रिया बना रहे हैं?

महानगर मेट्रो न्यूज़ पेपर अब एडमिनिस्ट्रेशन की ऐसी लापरवाही और स्कूल ट्रस्टियों की बड़ी लापरवाही के खिलाफ़ सीधे आवाज़ उठाता है। अगर ऐसी करप्ट पॉलिसी और खतरनाक स्कूलों के खिलाफ़ तुरंत सख़्त एक्शन नहीं लिया गया और दोषी अधिकारियों और ट्रस्टियों के खिलाफ़ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो मासूम बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे इस गलत काम के खिलाफ़ ज़ोरदार आवाज़ उठाई जाएगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments