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‘महानगर मेट्रो ’ मेगा-धमाका: गांधी के गुजरात की ‘रेलवे सेफ लाइन’ से करोड़ों की शराब की तस्करी! जनता पूछती है—सरकार कब्ज़ा करने वाले अधिकारियों और शराब तस्करों पर कार्रवाई करेगी?

गुजरात में शराब बैन के दावों के बीच एक डरावना सच सामने आया है जिसने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, दमन और सेलवास से आने वाली करोड़ों रुपये की विदेशी और देसी शराब अब किसी सड़क के रास्ते नहीं, बल्कि सीधे ट्रेनों के ज़रिए गुजरात के कोने-कोने तक पहुंचाई जा रही है। रेलवे अब शराब तस्करों के लिए शराब की तस्करी करने की ‘सबसे सेफ लाइन’ बन गई है। यह पूरा नेटवर्क कैसे चल रहा है और किसके आशीर्वाद से राज्य के युवाओं को बर्बाद किया जा रहा है, इसका खुलासा ‘पाको गुजरात’ की इस तीखी रिपोर्ट में होता है:

जबरन वसूली और कथित ‘एडमिनिस्ट्रेटर्स’ का खेल: जनता द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के अनुसार, रेलवे पुलिस (GRP) और RPF के कुछ भ्रष्ट कर्मचारी और अधिकारी हर महीने किश्तों (इंस्टॉलमेंट) में लाखों रुपये वसूलकर इस काले धंधे को खुला लाइसेंस देते हैं। हर बड़े अधिकारी के नाम पर सेट ‘एडमिनिस्ट्रेटर्स’ इस पूरे सिस्टम को ऐसे मैनेज करते हैं कि ट्रेन से उतारते समय पुलिस को शराब की मात्रा का पता भी न चले!

दक्षिण गुजरात से अहमदाबाद तक के स्टेशन ब्लॉक: शराब से भरे कोच और यात्रियों के बैग वापी, वलसाड, नवसारी, सूरत, अंकलेश्वर, भरूच, वडोदरा होते हुए सीधे अहमदाबाद और साबरमती रेलवे स्टेशनों पर खाली किए जाते हैं। ये सभी बड़े स्टेशन बूटलेगर्स के खुले अड्डे बन गए हैं। युवाओं की दौलत की बर्बादी का ज़िम्मेदार कौन?: राज्य में हर दिन करोड़ों रुपये की शराब बिक रही है, जिससे हज़ारों परिवार बर्बाद हो रहे हैं और युवा नशे की लत में धकेले जा रहे हैं। फिर भी लोकल पुलिस और रेलवे सिक्योरिटी फोर्स तमाशा देख रही है।

मुख्यमंत्री, होम डिपार्टमेंट और SMC से सीधे सवाल:

  1. क्या राज्य के मुख्यमंत्री और होम डिपार्टमेंट लाखों-करोड़ों की वसूली के इस खेल को रोकने के लिए कोई सख्त कदम उठाएंगे?
  2. क्या स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) या रेलवे डिपार्टमेंट के बड़े अधिकारी इन स्टेशनों पर रेड मारकर इन कथित ‘एडमिनिस्ट्रेटर्स’ और शराब तस्करों को जेल भेजेंगे या सिस्टम पैसे की ताकत के आगे झुक जाएगा?
  3. जब कानून लागू करने वाली एजेंसियां ​​ही खाकी पर कालिख पोत रही हैं, तो जनता इंसाफ के लिए किसके पास जाए?

अगर सिस्टम में अब भी थोड़ी भी नैतिकता बची है, तो रेलवे स्टेशनों पर चल रही शराब की इस ‘सेफ लाइन’ को तुरंत बुलडोजर से गिराना होगा। ‘पक्को गुजरात’ इस स्कैम का पर्दाफाश तब तक करता रहेगा जब तक सभी ज़िम्मेदार लोग जेल नहीं चले जाते!

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