गुजरात में जैसे-जैसे आने वाले असेंबली इलेक्शन पास आ रहे हैं, पॉलिटिकल गर्मी अपने पीक पर पहुंच गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने पूरे राज्य में एक एग्रेसिव कैंपेन शुरू कर दिया है। ‘गमदे गमदे यीशु गढ़वी’ के नारे के साथ AAP के रीजनल लीडर और जनता के जाने-माने चेहरे यीशु गढ़वी के साथ सीधे लोगों से कॉन्टैक्ट कर रहे हैं। सरकारी सिस्टम की इनएक्शंस, महंगाई, बेरोजगारी और बड़े पैमाने पर करप्शन के खिलाफ ‘AAP’ द्वारा चलाए जा रहे इस तेज कैंपेन ने रूलिंग पार्टी के पॉलिटिकल इक्वेशन में हलचल मचा दी है।
गांवों के चोरों से लोगों के दिलों तक का सफर
ईसुदान गढ़वी अपने जर्नलिज्म के दिनों से ही गुजरात के लोगों और किसानों की आवाज के तौर पर जाने जाते रहे हैं। अब कैंपेन के दौरान वे सीधे गांवों में जाकर आम लोगों के सवाल सुन रहे हैं। लोकल मुद्दों पर सीधा हमला: बिजली, पानी, सड़क, हेल्थ और एजुकेशन जैसी बेसिक सुविधाओं में सिस्टम की नाकामी मीटिंग और जुलूस में सामने आ रही है।
गांवों में सुलगता गुस्सा: खाद की कीमतों, खेती की उपज के सस्ते दाम और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर गांव के लोगों का छिपा गुस्सा अब पब्लिक प्लेटफॉर्म से आवाज़ बन रहा है।
अगर आने वाले चुनावों में ‘AAP’ ने धूम मचा दी तो क्या होगा?
अगर आम आदमी पार्टी गांवों और शहरी इलाकों में उम्मीद के मुताबिक परफॉर्म करने में कामयाब रही तो गुजरात की पारंपरिक दो-पार्टी पॉलिटिक्स खत्म हो सकती है।
- रूलिंग पार्टी के लिए बड़ा खतरा: BJP के पुराने गढ़ में ‘AAP’ का खराब परफॉर्मेंस रूलिंग सिस्टम को अपनी पॉलिसी बदलने और ज़मीनी हकीकत मानने पर मजबूर कर देगा।
- जनता का मूड और हवा में बदलाव: आम जनता अब सिर्फ लुभावने वादों या नारों से खुश होने को तैयार नहीं है। जनता सिस्टम से ठोस नतीजों और करप्शन-फ्री गवर्नेंस की उम्मीद कर रही है। अगर ‘AAP’ एक अपोज़िशन पार्टी के तौर पर जनता का भरोसा जीतने में कामयाब रही तो यह राज्य की पॉलिटिकल दिशा बदल देगी। जनता का सरकार को संदेश
इसुदान गढ़वी के इस बड़े कैंपेन से एक बात तो साफ़ हो जाती है कि सरकार के डंडे और काम न करने के खिलाफ जनता के मन में नाराज़गी की आग जल रही है। अगर समय रहते जनता के बुनियादी मुद्दों का हल नहीं निकाला गया, तो आने वाले चुनावों में जनता का ‘मूड’ बैलेट बॉक्स के ज़रिए ऐसा जवाब देगा जिससे सत्ता का सिंहासन हिल जाएगा।

