Gujarat News: गुजरात के पोरबंदर में पहली बार शराब की दुकान खोलने की अनुमति दी गई है। यह फैसला राज्य सरकार द्वारा लिया गया है, जिससे स्थानीय लोगों और गांधीवादी विचारधारा से जुड़े लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। महात्मा गांधी का जन्मस्थान पोरबंदर है और वे शराबबंदी के प्रबल समर्थक रहे हैं।
गुजरात में शराबबंदी नीति लागू है, जिसका गांधीवादी विचारधारा पर गहरा असर रहा है। गांधी जी ने शराब को सामाजिक बुराई मानते हुए इसके खिलाफ हमेशा आवाज़ उठाई थी। उनका मानना था कि शराब गरीबी, घरेलू हिंसा और नैतिक पतन को बढ़ावा देती है।
आजादी के बाद गुजरात राज्य ने गांधी जी के विचारों को ध्यान में रखते हुए शराबबंदी को अपनाया। लेकिन अब पोरबंदर जैसे शहर में सरकार द्वारा पहली बार शराब की दुकान को मंजूरी देने पर स्थानीय समाज में असंतोष फैल गया है।
स्थानीय नागरिकों और गांधीवादी संगठनों का कहना है कि यह फैसला गांधी जी की नीतियों के विपरीत है। लोगों ने यह सवाल उठाया कि क्या सरकार आर्थिक लाभ के लिए गांधीवादी मूल्यों से समझौता कर रही है।
इस फैसले के बाद कई स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के निर्णय का विरोध जताया। उनका कहना है कि पोरबंदर में शराब दुकान खोलना सिर्फ गांधीजी के विचारों का अपमान नहीं है, बल्कि इससे सामाजिक ताना-बाना भी प्रभावित होगा।
कई गांधीवादी संगठनों ने कहा है, “गुजरात की शराब नीति पर महात्मा गांधी का गहरा प्रभाव रहा है। गांधी जी पूर्ण नशामुक्ति के समर्थक रहे हैं।” उन्होंने चिंता जताई कि शराब की दुकान खुलने से युवाओं और समाज पर गलत प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, सरकार ने इस फैसले के पीछे कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। लेकिन स्थानीय स्तर पर लगातार इसका विरोध हो रहा है। पोरबंदर के निवासी और गांधीवादी कार्यकर्ता इस निर्णय को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
गुजरात की शराब नीति वर्षों से देशभर में मिसाल रही है। लेकिन पोरबंदर जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के शहर में शराब दुकान खोलने को लेकर बहस छिड़ गई है। अब देखना यह है कि सरकार स्थानीय जनता और गांधीवादी संगठनों की भावनाओं का सम्मान करती है या नहीं।

