दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भोजपुर क्षेत्र में तीन कांवड़ियों की बाइक को एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में दो कांवड़ियों की मौके पर ही मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल हो गया। कांवड़िये हरिद्वार से जल लेकर अपने घर लौट रहे थे।
यहां दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भोजपुर क्षेत्र के पास हरिद्वार से जल लेकर अपने घर लौट रहे तीन कांवड़ियों की बाइक को एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक कई मीटर तक सड़क पर घिसटती चली गई। तीनों कांवड़िये हवा में उछलकर दूर जा गिरे। हादसे में दो कांवड़ियों की मौके पर ही मौत हो गई। एक गंभीर रूप से घायल कावड़िये को अस्पताल मे भर्ती किया गया है। दुर्घटना के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। मृतकों की पहचान अलीगढ़ निवासी राजकुमार और ज्ञान प्रकाश के रूप में हुई है। बदायूं निवासी प्रदीप गंभीर रूप से घायल बताया गया है।
टक्कर से हवा में उछल गए कांवड़िये
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के दौरान एक कांवड़िये का सिर डिवाइडर से टकरा गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। दूसरे कांवड़िये को भी सिर और शरीर के अन्य अंगों पर गंभीर चोटें आईं और उसने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के तुरंत बाद आसपास से गुजर रहे राहगीरों ने पुलिस व हेल्पलाइन को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस और एक्सप्रेसवे प्रबंधन की टीम मौके पर पहुंची। घायल को अस्पताल भेजा गया, जबकि दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
पुलिस ने बताया कि दुर्घटना को अंजाम देने वाले वाहन की तलाश शुरू कर दी गई है। एक्सप्रेसवे पर लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि फरार चालक और वाहन की पहचान करके जल्द गिरफ्तारी की जा सके।
मृतकों के परिजन सदमे में
इस हादसे की सूचना से मृतकों के परिवार गहरे सदमे में हैं। राजकुमार और ज्ञान प्रकाश मूल रूप से अलीगढ़ के रहने वाले थे, लेकिन लंबे समय से गुरुग्राम में रहकर काम कर रहे थे। परिजनों के अनुसार, करीब पांच वर्ष पहले राजकुमार पर गुरुग्राम में मारपीट का एक मुकदमा दर्ज हुआ था, जिससे वह मानसिक तनाव में रहने लगे थे। इसी बीच चार वर्ष पहले उनकी पत्नी का बीमारी के कारण निधन हो गया, जिसके बाद वह पूरी तरह टूट गए थे।
परिजनों ने बताया कि राजकुमार हर वर्ष भगवान शिव की कृपा पाने और जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर कांवड़ यात्रा पर जाते थे। इस बार भी वह यह कहकर घर से निकले थे कि भोलेनाथ की कृपा से उनका मुकदमा समाप्त हो जाएगा और जीवन फिर से सामान्य हो जाएगा।

