वडोदरा/पादरा : वडोदरा ज़िले के ज़मीन बाज़ार में करोड़ों रुपये की कीमती ज़मीनों के सौदों और संदिग्ध कागज़ात को लेकर बड़ा धमाका हुआ है। करोड़ों रुपये के ज़मीन सौदों के पीछे सामने आया दयानंद ब्रोंटा का नाम हाल ही में काफ़ी चर्चा का केंद्र बना हुआ है। करोड़ों रुपये की ज़मीन की खरीद-फ़रोख्त के पीछे दयानंद ब्रोंटा का असली रोल क्या है? क्या वह सच में कोई असली ‘किसान’ है या फिर आंकड़ों का जाल बनाकर बनाया गया कोई बड़ा मुखौटा है? ऊंची इमारतें और बड़े प्रोजेक्ट बनाने वाले बिल्डरों के साथ कथित रिश्तों के साथ-साथ अरबों रुपये के ज़मीन सौदों को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
तलाटी का खानदानी राज और ‘सीताबेन’ शक के घेरे में!
इस पूरे विवाद में अनगढ़ गांव के तलाटी के खानदानी राज और मंज़ूरियों पर भी उंगलियां उठ रही हैं। आरोप लग रहे हैं कि सरकारी किताबों में दर्ज नामों और डॉक्यूमेंट्स में बहुत बड़ी गड़बड़ी है:
पहचान पर बड़े सवाल: क्या डॉक्यूमेंट्स में दिखाई गई सीताबेन आनंद ब्रोंटा सच में कर्नाटक या अनगढ़ की रहने वाली हैं? उनकी असली पहचान क्या है, इसे लेकर एडमिनिस्ट्रेशन में काफी राज़ है।
गैर-कानूनी कागज़ों का खेल? शक की सुई इस तरफ भी घूम रही है कि क्या लोकल लेवल पर दूसरे राज्यों के लोगों को ‘किसान’ दिखाकर कीमती ज़मीनें हड़पने या खरीदने का कोई बड़ा रैकेट चल रहा है।
बड़े बिल्डरों के साथ कथित नेटवर्क: काले पैसे का खेल?
दयानंद ब्रोंटा के शहर में ऊंची-ऊंची इमारतें बनाने वाले और करोड़ों का टर्नओवर करने वाले बड़े बिल्डरों और डेवलपर्स के साथ क्या अंदरूनी रिश्ते हैं? क्या काले पैसे को सफेद करने के लिए ऐसे संदिग्ध नामों का इस्तेमाल करके ज़मीनें खरीदी जा रही हैं? यह मुद्दा इस समय वडोदरा के रियल एस्टेट सेक्टर में एक हॉट टॉपिक है और लोकल लोगों के बीच इस पर काफी चर्चा हो रही है। सख्त और सरकारी जांच की मांग
कागजों पर उठाए गए आंकड़ों और विरासत के नोटों के पीछे का काला सच क्या है, यह तो रेवेन्यू डिपार्टमेंट और कलेक्टर सिस्टम द्वारा की जाने वाली हाई-लेवल और सरकारी जांच के बाद ही सामने आएगा। लेकिन फिलहाल, इस ज़मीन सौदे के मामले में अनगढ़ गांव से लेकर बड़े बिल्डरों के पते तक काफी चुप्पी और हंगामा है!

