गांधीनगर/नर्मदा: गुजरात की पॉलिटिक्स में अचानक गर्मी आ गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के डेडियापाड़ा से विवादित और गुस्सैल आदिवासी MLA चैतर वसावा को 7 साल की जेल की सज़ा होने के बाद भी, अभी तक उनका MLA पद कैंसिल करने के लिए कोई ऑफिशियल प्रोसेस नहीं किया गया है! कानूनी नियमों के मुताबिक, 2 साल से ज़्यादा की सज़ा पूरी होते ही, असेंबली सेक्रेटरी या सरकार की तरफ से MLA पद को ऑटोमैटिकली या तुरंत डिसक्वालिफाई करने का लेटर जारी कर दिया जाता है। लेकिन इस मामले में पेपर भेजने में ‘देरी’ अब कई पॉलिटिकल अटकलों और चर्चाओं को जन्म दे रही है।
BJP सरकार के ‘ढीले रवैये’ के पीछे क्या मैथ है?
जब एडमिनिस्ट्रेशन आमतौर पर अपोज़िशन नेताओं के खिलाफ़ कानून का चाबुक चलाने में नहीं हिचकिचाता, तो चैतर वसावा के मामले में BJP सरकार की यह चुप्पी और ढीला रवैया क्या दिखाता है? अंदर क्या पक रहा है? पॉलिटिकल गलियारों में सनसनीखेज चर्चाएँ शुरू हो गई हैं कि क्या BJP और चैतर वसावा के बीच पर्दे के पीछे कोई बड़ी ‘सेटिंग’ या ‘पॉलिटिकल सेटलमेंट’ हो रहा है?
असेंबली स्पीकर और एडमिनिस्ट्रेशन का साइलेंट गेम: सज़ा सुनाए हुए कई दिन बीत जाने के बाद भी, असेंबली में पोस्ट कैंसिल करने की कानूनी मंज़ूरी या लेटर क्यों रोके रखा गया है? क्या एडमिनिस्ट्रेशन को ऊपर से कोई खास ‘इंस्ट्रक्शन’ है?
क्या चैतर वसावा BJP में शामिल होंगे? – एक बड़ा सवाल!
अगर ट्राइबल बेल्ट में मज़बूत पकड़ रखने वाले चैतर वसावा BJP में शामिल होते हैं या BJP के साथ कोई इनडायरेक्ट एग्रीमेंट करते हैं, तो साउथ गुजरात और ट्राइबल बेल्ट की पूरी पॉलिटिकल तस्वीर बदल सकती है।
- BJP के लिए फ़ायदा: BJP को ट्राइबल इलाकों में एक अग्रेसिव और ज़मीन से जुड़े लीडर की ज़रूरत है। अगर चैतर वसावा केस की बेड़ियों से बचने या अपना पॉलिटिकल भविष्य सुरक्षित करने के लिए BJP में शामिल होते हैं, तो भगवा ब्रिगेड के लिए ट्राइबल वोट बैंक पर कब्ज़ा करना आसान हो जाएगा।
- चैतर वसावा के लिए मजबूरी या स्ट्रैटेजी? 7 साल की सज़ा का मतलब है कि उनका पॉलिटिकल करियर लंबे समय के लिए रुक सकता है। ऐसे में, क्या सज़ा से राहत पाने या सरकार से सपोर्ट पाने के लिए उनके पास BJP में शामिल होना ही एकमात्र ऑप्शन बचा है?
AAP और विपक्ष में भारी हलचल
इस स्थिति से आम आदमी पार्टी खेमे में भी भारी हलचल और बेचैनी है। अगर चैतर वसावा BJP का भगवा चोला ओढ़ लेते हैं, तो यह गुजरात में ‘AAP’ के लिए एक बड़ा झटका साबित होगा।
अब देखना यह है कि BJP सरकार इस पेपर को रोककर चैतर में BJP के बसने के दरवाज़े खुले रखती है, या यह सिर्फ़ कानूनी प्रक्रिया में देरी है? अगले 24 से 48 घंटों में गुजरात की राजनीति में बड़े धमाके की पूरी संभावना है!

