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अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में BJP की सरकार है, लेकिन सेंट्रल ज़ोन में लतीफ़ गैंग के लोग काम कर रहे हैं! क्या प्रशासन की चुप्पी है या मिलीभगत?

एस्टेट डिपार्टमेंट के प्रेशर अकाउंट सेक्शन में 15 से 20 साल से एक ही व्यक्ति का दबदबा: टेंडर भरने वालों को जेल और पाकिस्तान से धमकियां, बिल में गड़बड़ी, बाल मज़दूरी और सुरक्षा एजेंसियों की नज़र में रहने वाले लोगों से संबंध के गंभीर आरोप!

अहमदाबाद। स्मार्ट सिटी अहमदाबाद में जागरूक नागरिकों और प्रशासनिक व्यवस्था के सामने एक बहुत ही चौंकाने वाली बात सामने आ रही है। अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में BJP की सत्ता होने के बावजूद, इस बात की काफी चर्चा है कि शहर के बेहद संवेदनशील सेंट्रल ज़ोन में एस्टेट डिपार्टमेंट के प्रेशर अकाउंट सेक्शन में एक खास नेटवर्क काम कर रहा है। गंभीर आरोप हैं कि पूर्व माफिया डॉन अब्दुल लतीफ़ गैंग से जुड़े लोग अभी भी कॉर्पोरेशन के कॉन्ट्रैक्ट्स पर कब्ज़ा जमाए हुए हैं, जिससे प्रशासन के कामकाज पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।

15 से 20 साल से प्रेशर कम करने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स पर एकाधिकार

मिली जानकारी के अनुसार, अमजद सिकंदर खान पठान नाम के एक कॉन्ट्रैक्टर को पिछले 15 से 20 सालों से लगातार अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के सेंट्रल ज़ोन में प्रेशर कम करने के लिए मज़दूर उपलब्ध कराने का कॉन्ट्रैक्ट मिल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जब भी इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए कोई नया टेंडर निकाला जाता है, तो अगर कोई दूसरा व्यक्ति या एजेंसी टेंडर भरने की हिम्मत करती है, तो उसे अब्दुल लतीफ़ गैंग के जेल में बंद गुंडों और पाकिस्तान भाग चुके असामाजिक तत्वों से धमकियां मिलती हैं। इस डर और धमकी के कारण, कोई दूसरा प्रतियोगी टेंडर प्रक्रिया में टिक नहीं पाता और यह कॉन्ट्रैक्ट लगातार उसी व्यक्ति को मिलता रहता है।

आपराधिक बैकग्राउंड और जेल से संबंध

इस मामले की गहन जांच से पता चला है कि अमजद सिकंदर खान पठान का भाई, आज़म सिकंदर खान पठान, पूर्व माफिया डॉन अब्दुल लतीफ़ का सक्रिय गुर्गा था और अभी उम्रकैद की सज़ा काट रहा है। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के एस्टेट डिपार्टमेंट – जिसे बहुत महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है – में ऐसे आपराधिक इतिहास और संबंधों वाले परिवार के सदस्यों का दबदबा स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। राष्ट्रीय सुरक्षा और पाकिस्तान कनेक्शन की चिंताएं

सबसे गंभीर और चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि अमजद सिकंदर खान पठान के पाकिस्तान में पारिवारिक संबंध और संपर्क हैं। स्थानीय स्तर पर यह आशंका जताई जा रही है कि ऐसे संपर्कों के ज़रिए देश की संवेदनशील जानकारी का आदान-प्रदान हो सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले अमजद पठान के एक बेहद करीबी व्यक्ति को गुजरात एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने पाकिस्तानी सिम कार्ड और गैर-कानूनी गतिविधियों के मामले में पकड़ा था। राष्ट्रीय सुरक्षा के नज़रिए से यह भी एक बहुत गंभीर मामला है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोग, जो सुरक्षा एजेंसियों की नज़र में हैं, वे कॉर्पोरेशन के टेंडर के कामों में सक्रिय बने हुए हैं।

बिलिंग में बड़ा घोटाला, बाल श्रम और शर्तों का पूरी तरह उल्लंघन
सिर्फ़ दबदबे और डर का ही मामला नहीं है, बल्कि काम में भारी भ्रष्टाचार के आरोप भी हैं:

  1. कागज़ों पर और असलियत में मज़दूर: दबाव हटाने के लिए कागज़ों पर ज़्यादा मज़दूर दिखाकर बड़े बिल मंज़ूर कराए जाते हैं, लेकिन असल साइट पर उतने मज़दूर मौजूद नहीं होते। पर्याप्त मज़दूर उपलब्ध कराए बिना बिल पास कराने का बड़ा घोटाला चल रहा है।
  2. बाल श्रम का शोषण: टेंडर के नियमों के अनुसार वयस्क और सक्षम मज़दूरों को काम पर रखना होता है, लेकिन इसके बजाय 18 साल से कम उम्र के नाबालिगों से गैर-कानूनी काम कराया जा रहा है।
  3. यूनिफॉर्म और सुरक्षा नियमों की अनदेखी: टेंडर की साफ़ शर्तों, जैसे मज़दूरों को सही यूनिफॉर्म, पहचान पत्र और सुरक्षा उपकरण देना, का पूरी तरह उल्लंघन किया जा रहा है।

मुख्य सवाल जिनके जवाब नागरिक मांग रहे हैं:

क्या बीजेपी-शासित अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अधिकारी इन सभी मामलों से अनजान हैं, या वे आँखें मूंदे हुए हैं?
जेल में बंद और देश से भाग चुके माफियाओं के नाम पर धमकी देकर टेंडर प्रक्रिया को हाईजैक किया जा रहा है, तो पुलिस और प्रशासन इन गैंगस्टरों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं?
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की नज़र में रहने वाले लोगों से संबंध रखने वालों को बार-बार सरकारी पैसा क्यों दिया जा रहा है?
एस्टेट विभाग के उन ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कब निगरानी और जांच होगी जिन्होंने बाल श्रम और फ़र्ज़ी बिलों को मंज़ूरी दी?
यह पूरा मामला बेहद गंभीर है और सिर्फ़ वित्तीय भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा है। अब यह देखना बाकी है कि इस रिपोर्ट के बाद अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और गृह विभाग के आला अधिकारी क्या कड़े कदम उठाते हैं!

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