अहमदाबाद। केंद्रीय राजनीति और मोदी कैबिनेट में शिक्षा मंत्रालय का इतिहास अनोखा और दिलचस्प रहा है। अभी धर्मेंद्र प्रधान यह अहम ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन उनसे पहले शिक्षा मंत्री रहे तीन नेताओं को लेकर राजनीतिक गलियारों में एक दिलचस्प चर्चा ज़ोर पकड़ रही है।
खास बात यह है कि धर्मेंद्र प्रधान से पहले शिक्षा मंत्री रहे सभी नेता, इस पद से हटने के कुछ ही सालों के भीतर अलग-अलग वजहों से केंद्रीय कैबिनेट से भी बाहर हो गए। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय की ज़िम्मेदारी संभालने वाले नेताओं में स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर और रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ शामिल हैं। शुरुआत में स्मृति ईरानी ने मानव संसाधन विकास मंत्री के तौर पर कार्यभार संभाला। बाद में यह मंत्रालय प्रकाश जावड़ेकर के पास आया और फिर रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ शिक्षा मंत्री बने। हालांकि, इस मंत्रालय से हटने के बाद, समय के साथ ये तीनों नेता केंद्रीय कैबिनेट की अहम भूमिकाओं से भी हटा दिए गए। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, देश की नीतियों और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति जैसे बड़े फैसलों के लिए शिक्षा मंत्रालय को बहुत संवेदनशील और अहम मंत्रालय माना जाता है। इस पद पर रहने के बाद नेताओं का कैबिनेट से बाहर होना महज़ एक संयोग है या राजनीतिक समीकरण का हिस्सा, यह फिलहाल राजनीति में चर्चा का गर्म विषय बना हुआ है।

