नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली से मुंबई तक शुरू युवाओं के आंदोलन के जरिए विपक्षी पार्टियां सरकार को निशाना बना रही हैं। महाराष्ट्र निर्माण सेना ( मनसे ) अध्यक्ष राज ठाकरे ने दिल्ली में स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जवाबदेही लेने को कहा है।
मुंबई: नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली से मुंबई तक शुरू युवाओं के आंदोलन के जरिए विपक्षी पार्टियां सरकार को निशाना बना रही हैं। महाराष्ट्र निर्माण सेना ( मनसे ) अध्यक्ष राज ठाकरे ने दिल्ली में स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जवाबदेही लेने को कहा है।
1- सोशल मीडिया के जरिए सवाल:
राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यदि विद्यार्थियों को पीटने वाले शिक्षक दंडित हो सकते हैं तो प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर लाठी चलाने वाले पुलिसकर्मियों और इसका आदेश देने वालों की जवाबदेही क्यों नहीं तय होती ? मुंबई में भी बड़े पैमाने पर युवा प्रदर्शन कर रहे हैं, इसमें राज ठाकरे से लेकर अमित और आदित्य ठाकरे भाग ले रहे हैं।
2 – संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के देशों का हवाला:
राज ठाकरे ने अपने पोस्ट में कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर जिन्हें एमनेस्टी इंटरनेशनल भी मान्यता देता है, स्पष्ट कहते हैं कि जब भी बल प्रयोग किया जाए वह संविधान और कानून के दायरे में आवश्यक तथा परिस्थितियों के अनुपात में होना चाहिए। साथ ही उसके लिए जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। नॉर्वे, जर्मनी, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और न्यूजीलैंड जैसे देशों में पुलिस द्वारा बल प्रयोग की हर घटना की गंभीर जांच होती है। जांच केवल बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों की नहीं, बल्कि आदेश देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी होती है। भारत में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।
3 – किसके आदेश पर हुई लाठीचार्ज :
राज ठाकरे ने कहा कि दिल्ली में पुलिस ने छात्रों पर अंधाधुंध लाठीचार्ज किया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कुछ परिस्थितियों में सीमित बल प्रयोग को समझा जा सकता है, लेकिन यहां जिस तरह की हिंसा दिखाई दे रही है, वह प्रतिशोध जैसी प्रतीत हुई। सामने आए वीडियो में केवल प्रदर्शनकारी छात्र ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद आम लोग भी बेरहमी से पीटे जाते और रौंदे जाते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ऐसी कार्रवाई बिना ऊपर से मिले स्पष्ट आदेश के नहीं कर सकती।
4 – क्या आदेश देने वाले संविधान से ऊपर:
ऐसे में सवाल उठता है कि उन्हें पीटने का औचित्य क्या था? और पुलिस को ऐसा करने का अधिकार किसने दिया? जिस तरह शिक्षकों को छात्रों को पीटने की अनुमति नहीं है, उसी तरह पुलिस को भी नहीं होनी चाहिए। फिर ऐसा क्यों हुआ ? चाहे महाराष्ट्र पुलिस हो या देश की कोई अन्य पुलिस, कई बार पुलिसकर्मियों के पास आदेशों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। इसलिए पूरी जिम्मेदारी केवल उन पर नहीं डाली जा सकती। असली सवाल यह है कि इतनी बेरहमी से छात्रों को पीटने के आदेश देने का अधिकार किसने दिया? क्या आदेश देने वाले खुद को संविधान से ऊपर मानते हैं?
5 -सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल :
अब सवाल यह है कि यह सुनिश्चित कौन करेगा? एक ओर देश के मुख्य न्यायाधीश कथित रूप से इन युवाओं को “कॉकरोच” कहकर संबोधित करते हैं, वहीं दूसरी ओर सर्वोच्च न्यायालय यह कहता है कि उसके पास पिटाई के वीडियो देखने का समय नहीं है। यदि ऐसा है, तो फिर उसके पास समय किस बात के लिए है? आज नौजवान इसलिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं क्योंकि उन्हें मौजूदा सरकार से कोई उम्मीद नहीं बची है।

