बड़वानी के राजपुर में एक ही गोत्र में शादी करने पर कुशवाहा समाज ने नवदंपती और उनके परिवारों का आजीवन बहिष्कार कर ₹51-51 हजार का जुर्माना लगा दिया। मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने जोड़ों को पुलिस सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं।
बड़वानी में एक ही गोत्र में शादी पर बवाल
बड़वानी: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले के राजपुर में एक ही गोत्र में प्रेम विवाह करने वाले युवक-युवती और उनके परिवारों का सामाजिक बहिष्कार किए जाने का मामला सामने आया है। कुशवाहा समाज की बैठक में दोनों परिवारों पर 51-51 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि विवाह में शामिल रिश्तेदारों और मेहमानों पर भी 5,100 रुपये तक का दंड तय किया गया। मामले में दंपती ने हाईकोर्ट की शरण ली, जिस पर इंदौर खंडपीठ ने अंतरिम राहत देते हुए जरूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
10 पीढ़ियों का हवाला, फिर भी फरमान
राजपुर निवासी महेंद्र लोनारे ने बताया कि उनके पुत्र हर्ष लोनारे और निकिता कई वर्षों से एक-दूसरे को जानते थे। दोनों परिवारों की सहमति के बाद उनका विवाह संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि दोनों एक ही गोत्र के हैं, लेकिन पिछले 10 पीढ़ियों से दोनों परिवारों के बीच कोई वैवाहिक संबंध नहीं हुआ था। साथ ही कानून की दृष्टि से विवाह में कोई बाधा नहीं थी, इसलिए परिवारों ने सहमति से शादी कराई।
विरोध करने वाले पूर्व महामंत्री पद से हटाए गए
महेंद्र लोनारे के अनुसार, विवाह से पहले समाज के कुछ लोगों ने बैठक कर प्रस्ताव पारित किया था कि यदि यह शादी होती है तो दोनों परिवारों को 11 वर्ष के लिए समाज से निष्कासित किया जाएगा और दोनों पक्षों से 51-51 हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। इसके अलावा शादी में शामिल होने वाले बारातियों और समाज के सदस्यों पर 2,100 रुपये का दंड लगाने का भी निर्णय लिया गया था। कुछ मेहमानों ने तो समाज के भय के कारण दंड की राशि भर भी दी है।
उन्होंने बताया कि विवाह संपन्न होने के बाद समाज की दोबारा बैठक हुई, जिसमें दोनों परिवारों को 11 वर्ष से बढ़ा कर आजीवन समाज से बहिष्कृत करने का निर्णय लिया गया। साथ ही शादी में शामिल लोगों पर लगाया गया जुर्माना 2,100 रुपये से बढ़ाकर 5,100 रुपये कर दिया गया।
पीड़ित पक्ष ने क्या कहा
आज के दौर में अंतरजातीय विवाह तक स्वीकार किए जा रहे हैं, जबकि हमारी शादी तो कानूनन पूरी तरह वैध है। इसके बावजूद हमें और हमारे परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। निकिता, दुल्हन
हर्ष और निकिता ने किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। समाज के गलत फैसले का विरोध करने पर मुझे छह वर्ष के लिए पद से हटा दिया गया।
नंदराम कुशवाहा, पूर्व जिला महामंत्री, कुशवाहा समाज
हर्ष लोनारे ने कहा कि उन्होंने कई वर्षों के प्रेम संबंध के बाद दोनों परिवारों की सहमति से विवाह किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज के कुछ पदाधिकारियों ने इस विवाह को परंपरा के विरुद्ध बताते हुए उनके परिवारों का बहिष्कार कर आर्थिक दंड लगा दिया है।
जिम्मेदार बोले- कोई नोटिस नहीं मिला
कुशवाहा समाज के पूर्व जिला महामंत्री नंदराम कुशवाहा ने भी समाज के निर्णय का विरोध किया। उन्होंने कहा कि हर्ष और निकिता ने किसी कानून का उल्लंघन नहीं किया है। उनका कहना है कि समाज के फैसले का विरोध करने पर उन्हें छह वर्ष के लिए पद से हटा दिया गया। वहीं, कुशवाहा समाज के बड़वानी, खरगोन और धार इकाई के अध्यक्ष रमेशचंद्र कुशवाहा ने कहा कि आरोप निराधार है, उन्हें अभी तक हाईकोर्ट से कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है। नोटिस मिलने पर वे अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखेंगे।
हाईकोर्ट ने राज्य शासन से मांगा जवाब
महेंद्र लोनारे ने बताया कि पुलिस और प्रशासन से शिकायत के बावजूद समाधान नहीं होने पर उन्होंने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने संबंधित समाज पदाधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए राज्य शासन से जवाब मांगा है। साथ ही अदालत ने अंतरिम आदेश में कहा है कि यदि दंपती को किसी प्रकार की प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है और वे पुलिस सुरक्षा की मांग करते हैं, तो संबंधित पुलिस उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराए। मामला अब न्यायालय में विचाराधीन है।

