मध्य प्रदेश की मोहन सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल विधानसभा में पेश करने जा रही है। ड्राफ्ट के मुताबिक अब प्रदेश में लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
एमपी सरकार ने यूसीसी ड्राफ्ट को दी मंजूरी
भोपाल: मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़ते लिव-इन रिलेशनशिप के कल्चर को लेकर मोहन सरकार कड़े प्रावधान लागू करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता के ड्राफ्ट को मंजूरी मिल गई है।
अब मध्य प्रदेश में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर तीन महीने की जेल और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
20 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र में पेश होगा बिल
रविवार 19 जुलाई को जगदीशपुर किले में आयोजित विशेष कैबिनेट बैठक में इस यूसीसी विधेयक के प्रारूप पर मुहर लगाई गई। इस ऐतिहासिक विधेयक को सोमवार 20 जुलाई से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में पटल पर रखा जाएगा।
लिव-इन रिलेशनशिप के लिए 5 मुख्य नियम
अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: साथ रहने की शुरुआत के 1 महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
उम्र और पात्रता: न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए; दोनों पहले से विवाहित न हों और न ही प्रतिबंधित श्रेणी में आते हों।
अभिभावकों को सूचना: यदि कोई पार्टनर 21 साल से कम उम्र का है, तो शुरुआत और अंत की जानकारी माता-पिता को भेजी जाएगी।
थाने में रिकॉर्ड: रजिस्ट्रार द्वारा लिव-इन पार्टनर का रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को साझा किया जाएगा।
बच्चों को अधिकार: लिव-इन के दौरान पैदा हुए बच्चों को पूरी तरह से वैध माना जाएगा और उन्हें पूरा उत्तराधिकार मिलेगा।
बिना रजिस्ट्रेशन 1 महीने से ज्यादा रहना 3 महीने तक जेल ₹10,000
गलत जानकारी देना 3 महीने जेल ₹25,000
नोटिस के बाद भी बयान न देना 6 महीने तक जेल ₹25,000
वो बातें जो जानना जरूरी हैं
गुजारा भत्ता: पुरुष साथी के छोड़ने पर महिला पार्टनर अदालत के जरिए कानूनी पत्नी की तरह भरण-पोषण का दावा कर सकती है।
बिना रजिस्ट्रेशन पर सजा: 1 महीने से ज्यादा बिना रजिस्ट्रेशन साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या ₹10,000 जुर्माना हो सकता है।
गलत जानकारी पर कार्रवाई: गलत जानकारी देने पर 3 महीने की जेल व ₹25,000 जुर्माना और समन के बाद बयान न देने पर 6 महीने की जेल व ₹25,000 का जुर्माना लगेगा।

