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महाराष्ट्र में NCP की सियासी हलचल के बीच BJP का संदेश, दोनों गुटों के विलय के बाद ही NDA में एंट्री!

महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों धड़ों के विलय को लेकर हलचल तेज है. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी चाहती है कि दोनों गुट पहले आपस में विलय करें, तभी उन्हें एनडीए में शामिल किया जाएगा. इसकी बड़ी वजह परिसीमन बिल है, जिसके लिए एनसीपी एसपी के नौ सांसदों का समर्थन जरूरी माना जा रहा है.

महाराष्ट्र में एनसीपी के दोनों धड़ों के बीच विलय की चर्चा तेज हो गई है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि बीजेपी ने इस मामले में साफ संदेश दिया है. बीजेपी का कहना है कि अगर एनसीपी के दोनों गुट एनडीए में शामिल होना चाहते हैं तो पहले उन्हें आपस में विलय करना होगा. शरद पवार गुट को अलग से एनडीए में शामिल करने पर बीजेपी राजी नहीं है. साथ ही यह भी साफ किया गया है कि एनसीपी का विलय बीजेपी में नहीं होगा.

सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला परिसीमन बिल से जुड़ा हुआ है. एनसीपी शरद पवार गुट का इस बिल पर रुख नरम बताया जा रहा है और यह गुट बिल का समर्थन कर सकता है. एनसीपी एसपी के पास आठ लोकसभा सांसद और एक राज्यसभा सांसद हैं.

परिसीमन बिल को पास कराने के लिए इन नौ सांसदों का समर्थन बीजेपी के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है. इसी वजह से बीजेपी दोनों गुटों के विलय पर जोर दे रही है. सूत्रों का कहना है कि अगर दोनों धड़ों का विलय होता है तो बाद में दोनों तरफ से एक एक मंत्री पद दिया जा सकता है.

हालांकि एनसीपी एसपी के एनडीए को समर्थन देने की अटकलों से सुनेत्रा पवार असहज बताई जा रही हैं. हाल ही में शरद पवार और एकनाथ शिंदे की मुलाकात के बाद इन अटकलों को और बल मिला है.

इसी बीच शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने विलय की खबरों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि विलय की बात दो साल से चल रही है, लेकिन सुप्रिया ताई और जयंत पाटिल इससे इनकार करते रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें दोनों नेताओं पर भरोसा है.

बारामती में एनसीपी एसपी प्रमुख शरद पवार ने किसानों की कर्ज माफी पर भी बयान दिया. उन्होंने कहा कि सरकार ने नई तारीख दी है और राज्य सरकार को पहले घोषित की गई समयसीमा का पालन करना चाहिए था.

उन्होंने कहा कि अब सरकार ने नई समयसीमा दी है इसलिए वे उसका इंतजार करेंगे. किसानों को कर्ज से मुक्त कराना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. अगर सरकार कर्ज माफी लागू करती है तो उन्हें कोई शिकायत नहीं होगी, लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा. एनसीपी में संभावित फूट पर उन्होंने कहा कि अभी इस विषय पर बात करने का समय नहीं है.

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