दहेज GIDC इलाके में मौजूद SRF कंपनी एक बार फिर प्रदूषण के मुद्दे पर चर्चा के केंद्र में आ गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, कंपनी की सीमा से गुजरने वाले नाले और ड्रेनेज एरिया में संदिग्ध काला पानी छोड़ा जा रहा था। घटना की जानकारी मिलने पर गुजरात प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड (GPCB) के अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे और मौके का मुआयना करके पानी के सैंपल इकट्ठा किए।
मौके पर जो नजारा दिखा, वह चौंकाने वाला था। नाले में बह रहा पानी नॉर्मल पानी से बिल्कुल अलग और काला दिख रहा था। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। इस घटना को लेकर आसपास के स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों में काफी चिंता और गुस्सा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर इस पानी में केमिकल या दूसरे प्रदूषक हैं, तो इसका सीधा असर मिट्टी, ग्राउंडवाटर, खेती, जानवरों और इंसानों की सेहत पर पड़ सकता है। दहेज इलाका पहले से ही इंडस्ट्रियल इलाका है, इसलिए लोग लंबे समय से प्रदूषण से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं कि अगर कंपनी के पास एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) और ज़रूरी पर्यावरण सुविधाएं हैं, तो बाहर इस तरह का काला पानी कैसे दिख रहा है? क्या पानी को ठीक से ट्रीट किए बिना बाहर छोड़ा जा रहा है? साथ ही, पहले हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डेवलपमेंट के नाम पर लोगों की सेहत और पर्यावरण से समझौता करना मंज़ूर नहीं है। डेवलपमेंट के लिए इंडस्ट्री ज़रूरी हैं, लेकिन पर्यावरण के नियमों का पालन करना भी उतना ही ज़रूरी है।
स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि पूरी घटना की निष्पक्ष जांच हो।
पानी के सैंपल की लैब रिपोर्ट जारी की जाए।
आस-पास के पानी, ज़मीन और पर्यावरण की क्वालिटी की जांच हो।
अगर कंपनी दोषी पाई जाती है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए लगातार मॉनिटरिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए।
पूरा दहेज पंथक फिलहाल GPCB रिपोर्ट पर नज़र रखे हुए है। फिलहाल, गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (GPCB) ने साइट से पानी के सैंपल लिए हैं और लैब रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। इसलिए, अभी पूरे मामले की जांच चल रही है। पानी में कोई केमिकल, टॉक्सिक या प्रदूषण फैलाने वाले एलिमेंट हैं या नहीं, इस बारे में आखिरी नतीजा ऑफिशियल लैब रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगा।
अगर लैब रिपोर्ट में पानी में केमिकल या दूसरे प्रदूषण फैलाने वाले तत्व होने का पता चलता है, तो अब पूरा दहेज पंथक इस बात पर नजर रखे हुए है कि गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (GPCB) और संबंधित सरकारी अधिकारी SRF कंपनी के खिलाफ क्या एक्शन लेते हैं, कंपनी को नोटिस दिया जाता है या नहीं, और पर्यावरण से जुड़े कानूनों के तहत कानूनी एक्शन लिया जाता है या नहीं।
स्थानीय लोगों में यह भी मांग है कि अगर यह साबित हो जाता है कि कंपनी ने किसी भी तरह का पर्यावरण प्रदूषण किया है, तो सिर्फ नोटिस काफी नहीं होगा, बल्कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा और भरोसा दिया गया है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।
रिपोर्ट.. रंगुनी ज़ाकिर भरूच

