स्थान: करजन तालुका, वडोदरा : मुख्य आरोपी (आरोपित): सतीश पटेल (पूर्व विधायक एवं पूर्व चेयरमैन) : पीड़ित: करजन और आसपास के हजारों अन्नदाता (किसान) रिपोर्ट: महानगर मेट्रो न्यूज डेस्क
- गंधारा शुगर मिल का ₹25 करोड़ का घोटाला: गन्ना भी लिया, चीनी भी बेची, लेकिन किसानों को क्या मिला? सिर्फ आंसू!
कहते हैं कि सहकारी संस्थाएं किसानों के कल्याण के लिए होती हैं, लेकिन करजन तालुका की गंधारा शुगर मिल में कहानी बिल्कुल उलट है। मिल के तत्कालीन चेयरमैन और पूर्व विधायक सतीश पटेल पर आरोप है कि उन्होंने सत्ता के रसूख पर शुगर मिल में करीब 25 करोड़ रुपये का तगड़ा घोटाला किया।
सूत्रों के मुताबिक, इलाके के करीब 2500 भोले-भाले किसानों से दिन-रात की मेहनत से उगाई गई गन्ने की फसल ले ली गई। इस गन्ने से चीनी बनाकर बाजार और सरकार को बेच भी दी गई, लेकिन जब गरीब किसानों के हक का पैसा चुकाने का वक्त आया, तो सतीश पटेल ने हाथ खड़े कर दिए। अपने खून-पसीने की कमाई पाने के लिए ये किसान आज भी दर-दर भटक रहे हैं।
- करजन कॉटन विभाग में भी हेराफेरी: कपास रखने की जगह पर खड़ी कर दीं अवैध दुकानें!
सतीश पटेल की कथित अनियमितताएं यहीं नहीं थमतीं। करजन कॉटन पूर्व विभाग के चेयरमैन के रूप में सतीश पटेल ने कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर एक बड़ा खेल किया। किसानों के कपास की फसल को सुरक्षित रखने के लिए जो जगह आवंटित की गई थी, वहां कपास रखने के बजाय सतीश पटेल ने अवैध रूप से दुकानों का निर्माण करवा दिया। इन दुकानों को अवैध तरीके से बेचकर करोड़ों रुपये अपनी जेब में डाल लिए गए। इसके अलावा, एपीएमसी (APMC) में डायरेक्टर रहते हुए भी करीब 400 करोड़ रुपये का महाघोटाला अंजाम देने के गंभीर आरोप उन पर लगे हैं।
- बेटे ध्रुवल पटेल के स्कूल में अवैध निर्माण: नगरपालिका अध्यक्ष इलाबा के साथ कथित मिलीभगत?
सत्ता के नशे में चूर इस परिवार ने करजन नगरपालिका के नियमों की भी धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। सतीश पटेल के बेटे ध्रुवल पटेल करजन तालुका में ‘करजन पब्लिक स्कूल’ चलाते हैं। इस स्कूल की इमारत में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण किए जाने की शिकायतें उठी थीं, जिसके बाद करजन नगरपालिका ने उन्हें नोटिस भी थमाया था।
लेकिन हैरत की बात यह है कि नोटिस देने के बाद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंदरखाने चल रही चर्चाओं की मानें तो, करजन नगरपालिका की अध्यक्ष इलाबा और सतीश पटेल के बीच गहरी मिलीभगत है, जिसके चलते कानूनी फाइलों को दबा दिया गया है और कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा है।
- पिनाकिन पटेल की आत्महत्या: सतीश पटेल की ‘पठानी वसूली’ और सुसाइड नोट का राज
इन कथित घोटालों का सबसे स्याह और दर्दनाक पहलू यह है कि इसके कारण एक बेकसूर किसान को अपनी जान गंवानी पड़ी। शुगर मिल घोटाले के दौरान पिनाकिन पटेल नाम के एक स्थानीय किसान के लाखों रुपये फंस गए थे। आर्थिक तंगी से परेशान पिनाकिन पटेल को पैसों की सख्त जरूरत थी, जिसके लिए उन्होंने सतीश पटेल से ब्याज पर पैसे लिए।
एक तरफ शुगर मिल में जमा उनके अपने हक के पैसे डूब गए और दूसरी तरफ सतीश पटेल ने ब्याज की रकम वसूलने के लिए पठानी (क्रूर) वसूली शुरू कर दी। इस मानसिक प्रताड़ना और धमकियों से तंग आकर आखिरकार पिनाकिन पटेल ने मौत का रास्ता चुन लिया। खुदकुशी करने से पहले उन्होंने एक सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें साफ तौर पर दर्ज था— “मैं सतीश पटेल के उत्पीड़न और पठानी वसूली के कारण आत्महत्या कर रहा हूं।”
उस वक्त यह सुसाइड नोट मीडिया और सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था। लेकिन अफसोस की बात यह है कि तब सतीश पटेल सत्ताधारी दल के मौजूदा विधायक थे। पैसे और रसूख के बल पर इस मामले को रफा-दफा कर दिया गया और पीड़ित परिवार को न्याय के नाम पर सिर्फ ढांढस मिला।
- अन्नदाता बर्बाद: कपास किसानों की हालत भी दयनीय
सूत्रों से मिली चौंकाने वाली जानकारियों के अनुसार, सतीश पटेल के किसान विरोधी रवैए के कारण करजन तालुका के सैकड़ों किसान पूरी तरह कंगाल हो चुके हैं। जो किसान पहले गन्ने की खेती करके गर्व से अपना गुजारा करते थे, उनकी आजीविका छिन चुकी है। अब नौबत यह आ गई है कि करजन के कपास उगाने वाले किसान भी गहरे आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है कि अगर ऐसे सत्तालोभी और किसान विरोधी नेताओं के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कदम उठाकर उन्हें जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो आने वाले दिनों में कर्ज के बोझ तले दबे करजन के किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो जाएंगे।
अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इस ‘सफेदपोश’ और पूर्व विधायक के घोटालों की निष्पक्ष जांच कराकर पीड़ित किसानों को न्याय दिलाएगी? या फिर पैसे और पावर के दम पर यह काला कारोबार यूं ही चलता रहेगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

