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खाकी की आड़ में करजन में चल रहा अंधेर नगरी चौपट राजा जैसा तंत्र: एसपी और पीआई की साख बचाने के लिए SMC की रेड से पहले ही LCB द्वारा लोकेशन लीक करने का घिनौना पाप उजागर!

एलसीबी पीआई के वहीवटदार ‘भूपत रबारी’ और जेल-रिटर्न बुटलेगर ‘हनुभा कामड़िया’ ने पूरे करजन तालुका को जुआ-शराब के अड्डों में बदला; इस अवैध कारोबार और हफ्ताखोरी के पीछे आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी सरकार को उखाड़ फेंकने की बड़ी राजनीतिक साजिश का ‘महानगर मेट्रो’ પર महाविस्फोट!

खाकी के कलंकित किरदार: जेल की हवा खा चुका बुटलेगर हनुभा पुलिस को अपनी उंगलियों पर नचा रहा है!

गुजरात सरकार भले ही राज्य में सख्त शराबबंदी के गगनभेदी ढोल पीट रही हो और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी भले ही ड्रग्स और शराब मुक्त गुजरात के बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन वडोदरा जिले के करजन तालुका से सामने आई हकीकत ने गांधीनगर में बैठे उच्च प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। करजन में कानून-व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। पूरा तालुका मानो बुटलेगरों और जुआरियों के लिए पुलिस संरक्षण में एक ‘सेफ हेवन’ बन चुका है। करजन पुलिस स्टेशन की नाक के नीचे ही अरबों रुपये का अवैध नेटवर्क धड़ल्ले से चल रहा है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि इस पूरे काले साम्राज्य की कमान संभालने वाला कोई और नहीं, बल्कि खुद पुलिस का ही एक चहेता वहीवटदार हनुभा कामड़िया उर्फ हनु बुटलेगर है। यह वही हनुभा है जो पहले शराब के ही मामले में जेल की हवा खा चुका है और खाकी को दागदार करने के आरोप में सस्पेंड भी हो चुका है। ऐसे शातिर अपराधी ने आज पूरे करजन तालुका की पुलिस को कथित तौर पर अपनी जेब में रख रखा है।

पीआई के कमाऊ पूत: भूपत रबारी और हनुभा का आतंक और लाखों का हफ्ता राज!

सूत्रों से मिली बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज जानकारी के मुताबिक, वडोदरा एलसीबी पीआई के खास मोहरे और ‘कमाऊ पूत’ के रूप में कुख्यात भूपतभाई रबारी (डभोई बीट) और सस्पेंडेड बुटलेगर हनुभा कामड़िया इस पूरे हफ्ताखोरी के खेल के मुख्य सूत्रधार हैं। ये वहीवटदार करजन तालुका सहित पूरे वडोदरा जिले के बुटલેગरों, जुआ अड्डों और अवैध धंधेबाजों से हर महीने लाखों रुपये का हफ्ता वसूल कर पीआई साहब की तिजोरियों को भरने का काम कर रहे हैं। इन वहीवटदारों और पुलिस के इसी गठજોड़ के कारण जिले भर में बुटલેगर बेखौफ घूम रहे हैं और स्थानीय पुलिस इन अड्डों पर छापेमारी करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रही है, क्योंकि इस भ्रष्ट तिकड़ी की जड़ें ऊपर तक जुड़ी होने की चर्चा है!

लोकेशन के साथ खुली पोल: यहाँ धड़ल्ले से चल रहा मौत और सट्टे का खुला कारोबार

करोड़ों रुपये के हफ्ते के दम पर करजन पुलिस स्टेशन से महज 2 किलोमीटर दूर स्थित करमडी गाँव में करीब 15 से ज्यादा देसी शराब की भट्टियां बिना किसी डर के चल रही हैं, जहाँ खतरनाक केमिकल युक्त जहरीली देसी शराब बनाई जा रही है, जो कभी भी बड़े लट्ठाकांड (शराब कांड) को अंजाम दे सकती है। इसके अलावा:

कुलारी गाँव: नई नगरी पानी की टंकी के पास नगीन नाम का बुटલેગર बिना किसी खौफ के सरेआम वरली मटका का जुआ खिलवा रहा है।
सापा गाँव: नई वसाहत में भी यह वरली मटका का सट्टा धड़ल्ले से चल रहा है, जिससे युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है।
सीमडी से राणपुर रोड: राणपुर गाँव का सरपंच और बीजेपी युवा मोर्चा का अध्यक्ष पार्थ शाह खुद पूरे करजन तालुका में विदेशी शराब का बड़ा सिंडिकेट चला रहा है। इस रास्ते पर शराब का भारी जखीरा छिपाए जाने के पक्के सबूत मिले हैं।
कंडારી गाँव: टावर के पास अमित वसावा नाम का बुटલેગર अंग्रेजी शराब की खुली बिक्री कर रहा है।
बारियावास इलाका: परेश चूनावाड़ा नाम का शख्स सरेआम इंग्लिश शराब बेच रहा है।
SMC की रेड से पहले लोकेशन लीक करने का गंदा खेल: रक्षक ही बने भक्षक!

इस पूरे रैकेट का सबसे बड़ा और आत्मघाती खुलासा यह है कि जब भी कोई जागरूक नागरिक स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) में इन अड्डों की ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराता है, तो गांधीनगर से रेड पड़ने से ठीक पहले ही वडोदरा एलसीबी के कुछ भ्रष्ट कर्मी (चर्चा है कि SMC के ही एक कांस्टेबल ने वडोदरा LCB PI को मुखबिरी की है) वहीवटदार और करजन पुलिस को व्हाट्सएप पर लोकेशन भेजकर अलर्ट कर देते हैं कि ‘गाड़ी निकल चुकी है, अड्डे बंद कर दो!’। वडोदरा एलシーबी पीआई और करजन पुलिस स्टेशन के पीआई पटेल के वहीवटदारों ने पूरे वडोदरा जिले को बुटલેગरों के हाथों बेच दिया हो, ऐसी स्थिति बन चुकी है। इस मामले में जब पक्ष जानने के लिए समाचार ब्यूरो द्वारा एलसीबी पीआई साहब से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो वे मीडिया के सवालों से डरकर भागते नजर आए और फोन उठाना ही बंद कर दिया, जिससे साफ होता है कि यहाँ दाल में कुछ काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है!
पर्दे के पीछे की बड़ी राजनीतिक साजिश: बीजेपी सरकार को गिराने का खेल!

राजनीतिक गलियारों और विश्वस्त सूत्रों से मिली बेहद सनसनीखेज जानकारी के मुताबिक, करजन तालुका और वडोदरा जिले में चल रहे इस बेखौफ काले कारोबार, हफ्ताखोरी और चरमराई कानून-व्यवस्था के पीछे सिर्फ पैसा कमाना ही एकमात्र मकसद नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ी गुप्त राजनीतिक साजिश रची जा रही है। जनता के मन में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश पैदा करके, कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाकर और अपराध को बेलगाम करके आगामी विधानसभा चुनाव में वर्तमान बीजेपी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए अंदर ही अंदर यह पूरा ताना-बाना बुना जा रहा है। सरकारी तंत्र और संगठन के ही कुछ तथाकथित असंतुष्ट मोहरे बुटલેગरों के साथ मिलकर पूरी व्यवस्था को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश चला रहे हैं, ताकि चुनाव में सत्तारूढ़ दल को बड़ा राजनीतिक नुकसान पहुँचाया जा सके।

प्रधासन और सरकार से ‘महानगर मेट्रो’ के सीधे और तीखे सवाल:

  1. वडोदरा जिले के पुलिस कप्तान (SP) सुशील अग्रवाल और पीઆઈ पटेल अपनी नाक के नीचे चल रहे इस करोड़ों के हफ्ता राज और पीआई के कमाऊ मोहरों भूपत रबारी व हनुभा कामड़िया की करतूतों पर आंखें मूंदकर क्यों बैठे हैं? इस रहस्यमयी खामोशी के पीछे कौन सा बड़ा आर्थिक हित छिपा है और हफ्ते का हिस्सा कहाँ तक जा रहा है?
  2. सूत्रों के अनुसार एलसीबी पीआई और उनके वहीवटदार हर महीने लाखों का हफ्ता वसूल कर अरबों की बेनामी संपत्तियां बना चुके हैं, तो भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा इन पीआई और वहीवटदारों के बैंक खातों और संपत्तियों की गुप्त जांच क्यों नहीं की जा रही है? इन्हें किसका संरक्षण प्राप्त है?
  3. क्षेत्र के स्थानीय विधायक और सांसद इस गंभीर दूषण और जानलेवा केमिकल युक्त शराब के धंधे पर चुप्पी साधे क्यों बैठे हैं? क्या जनता के वोट और उनकी जान से ज्यादा ये अवैध वहीवट प्यारे हैं?
  4. सबसे बड़ा और ज्वलंत सवाल—करजन तालुका में केमिकल वाली देसी शराब की भट्टियां खुलेआम चल रही हैं, अगर भविष्य में यहाँ कोई भयानक लट्ठाकांड होता है और मासूम नागरिकों की मौत होती है, तो इसका असली जिम्मेदार कौन होगा? गांधीनगर में बैठी सरकार, जिले के एसपी या फिर हफ्ताखोरी में डूबे ये पीआई और उनके वहीवटદાર?

यह भ्रष्ट टोली और पर्दे के पीछे बैठे उनके राजनीतिक आका सूबे के मुख्यमंत्री की स्वच्छ छवि को सरेआम धूमिल कर रहे हैं। ‘महानगर मेट्रो’ न्यूज़ पेपर सीधे शब्दों में पूछता है कि बुटલેગरों के दम पर, कमाऊ वहीवटदारों के हफ्ता राज पर और सरकार को गिराने के इस खतरनाक खेल के खिलाफ गांधीनगर से कब सख्त हथौड़ा चलेगा या फिर जनता को इसी नरक में जीने के लिए मजबूर छोड़ दिया जाएगा?

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