महाराष्ट्र में सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के अंदर हाल के घटनाक्रम और शरद पवार की एनसीपी के नेता जयंत पाटिल के सीएम फडणवीस से मुलाकात ने राजनीति को गरमा दिया है। चर्चा हो रही है कि क्या मॉनसून सत्र से पहले शरद पवार कोई बड़ा फैसला ले जा रहे हैं।
मुंबई: संसद के मॉनसून सत्र से पहले महाराष्ट्र में एक बार फिर बैठकों का दौर शुरू हो गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों ने मंगलवार देर रात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ बैठक की। एनसीपी के दोनों गुटों के नेताओं के फडणवीस से मिलने के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। ऐसे में सभी की नजरें शरद पवार के अगले कदम पर टिकी हैं। दावा किया जा रहा है कि शरद पवार के ज्यादातर सांसद और विधायक चाहते हैं कि पार्टी एनडीए का हिस्सा बने, हालांकि कुछ दिन पहले शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले ने एनसीपी (एसपी) के एनडीए में जाने की संभावनाओं को खारिज कर दिया है।
ऐसे में जब बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए में मॉनसून सत्र से पहले एक-एक सांसद की गिनती हो रही है, तब शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी (एसपी) की अहमियत सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली एनसीपी से कहीं ज्यादा हो गई है, क्योंकि शरद पवार के पास आठ सांसद हैं। इनमें उनकी बेटी सुप्रिया सुले हैं। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसर NCP (SP) के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने शाम को फडणवीस से मिलने से पहले दक्षिण मुंबई स्थित शरद पवार के आवास ‘सिल्वर ओक’ पर उनसे मुलाकात की थी। इसके अलावा सत्ताधारी एनसीपी के नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात की। एक तरफ जहां शरद पवार की एनसीपी को लेकर संस्पेस बना हुआ है तो वहीं दूसरी सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली एनसीपी में उनके अध्यक्ष बनने को चुनौती दी गई है।
दुविधा का सामना कर रहे हैं शरद पवार
ये बैठकें ऐसे समय में हो रही हैं जब शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP (SP) को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक दुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सूत्रों का दावा है कि शरद पवार के 10 विधायकों में ज्यादातर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल होने के पक्ष में हैं। उनका तर्क है कि विपक्ष में रहने के कारण अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लिए विकास निधि और प्रशासनिक मंजूरी हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है। जयंत पाटिल ने हाल ही में पार्टी विधायकों तक यह बात पहुंचाई थी कि विधायकों का एक बड़ा हिस्सा एनडीए की ओर झुकाव रखता है। शरद पवार अब तक इस मामले पर चुप रहे हैं और उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी के अगले कदम का कोई संकेत नहीं दिया है।
क्या बाकी है अभी बड़ा खेला
अजित पवार के निधन के बाद यह चर्चा सामने आई थी कि वह दोनों एनसीपी के खेमों के विलय पर काम कर रहे थे। दोनों एनसीपी ने पुणे नगर निगम में मिलकर चुनाव भी लड़ा था। जिस तरह के घटनामक्रम एनसीपी के अंदर हो रहे हैं। उसके बाद चर्चा यह भी है कि क्या दोनों खेमों का विलय होगा। ऐसे में शरद पवार की पार्टी स्वत: ही एनडीए का हिस्सा बन जाएगी, क्यों सुनेत्रा पवार पहले से ही एनडीए में हैं। एनसीपी के दोनों गुटों के साथ आने में सबसे बड़ा रोड़ा कानून दांवपेंच है। शरद पवार खेमे ने सुप्रीम कोर्ट में केस किया हुआ है। मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले एनसीपी के ताजा घटनाक्रम और बैठकों ने राजनीतिक दिलचस्पी बढ़ा दी है। दावा किया जा रहा है कि शरद पवार अगर एनडीए में एंट्री लेते हैं तो सुप्रिया सुले मंत्री बन जाएंगी।

