सूरत में बाढ़ से बने गंभीर हालात के बाद प्रशासन और सरकार अब एक्शन मोड में आ गए हैं। बाढ़ का पानी उतरते ही लोगों को तुरंत राहत पहुंचाने के लिए राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने देर रात एक हाई-लेवल मीटिंग की। इस मीटिंग में बाढ़ प्रभावित इलाकों के हालात और चल रहे राहत कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। सरकार ने दावा किया है कि प्रभावित लोगों की मदद के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है।
9,100 परिवारों का घर-घर जाकर सर्वे पूरा, नकद मदद का वितरण शुरू
मीटिंग में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, प्रशासन की टीमों ने अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों में 9,100 परिवारों का रिकॉर्ड-तोड़ घर-घर जाकर सर्वे पूरा कर लिया है। इस सर्वे का मुख्य मकसद बाढ़ से लोगों के घरों को हुए नुकसान का सही अंदाज़ा लगाना है, ताकि कोई भी पीड़ित मदद से वंचित न रहे।
इस सर्वे के आधार पर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की है और अब तक 800 से ज़्यादा परिवारों को घरेलू नुकसान और नकद सहायता के तौर पर 6,800 रुपये की नकद मदद दी जा चुकी है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बाकी परिवारों को भी जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जाए।
अधिकारियों की देर रात क्लास ली, काम में तेज़ी लाने के आदेश
राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने सूरत के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आधी रात तक मीटिंग की और सफाई, बीमारी फैलने से रोकने के लिए दवाइयों का छिड़काव और बिजली-पानी की सुविधाओं को जल्द से जल्द बहाल करने का रोडमैप तैयार किया। मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि आपदा के इस समय में जनता को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए और मदद की रकम सीधे पीड़ितों तक पहुंचनी चाहिए।
महानगर मेट्रो न्यूज़ ओपिनियन:
जब बाढ़ का पानी घुसा तो जनता का आक्रोश स्वाभाविक था, लेकिन अब जब पानी उतर गया है, तो सरकार ने जिस तरह देर रात मीटिंग करके और 9,100 परिवारों का सर्वे करके मदद बांटना शुरू किया है, वह एक स्वागत योग्य कदम है। सिर्फ़ दिलासा ही नहीं, बल्कि आपदा के समय ऐसी तुरंत नकद मदद ग़रीब और मध्यम-वर्गीय परिवारों के आँसू पोंछ सकती है। अब यह देखना बाकी है कि सरकार की यह मदद बाकी हज़ारों परिवारों तक कितनी जल्दी पहुँचती है!

