एक तरफ, अहमदाबाद के नागरिक खराब सड़कों, ट्रैफिक और मॉनसून की मुसीबतों से परेशान हैं, तो दूसरी तरफ, अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) के पार्षदों और अधिकारियों के लिए सरकारी खर्च पर मौज-मस्ती करने की एक नई योजना सामने आई है। स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में लिए गए इस फैसले से जनता के टैक्स का पैसा बर्बाद होगा, जिससे टैक्स देने वालों में काफी नाराजगी है।
इस मामले पर ‘पक्को गुजरात न्यूज़’ की खास रिपोर्ट…
जनता के पैसे पर मौज-मस्ती: मोबाइल और लैपटॉप भत्ते में भारी बढ़ोतरी!
AMC स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन कमलेशभाई पटेल ने घोषणा की है कि पार्षदों और अधिकारियों के लिए मोबाइल और लैपटॉप खरीदने की सीमा (बजट) में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दी गई है।
मोबाइल भत्ता: पहले मोबाइल खरीदने की सीमा ₹12,000 थी, जिसे अब बढ़ाकर ₹17,000 कर दिया गया है। इसका मतलब है कि नेताजी अब महंगे स्मार्टफोन इस्तेमाल कर सकेंगे।
लैपटॉप, प्रिंटर, स्कैनर: इन डिजिटल उपकरणों को खरीदने की सीमा भी ₹10,000 बढ़ा दी गई है।
जनता सवाल उठा रही है कि जो सिस्टम सार्वजनिक कार्यों के लिए बजट की कमी का रोना रोता है, वह अपने नेताओं और अधिकारियों को खुश रखने के लिए इतना उदार कैसे हो जाता है?
दूसरी ओर, सड़कों पर ‘धंसाव’ (settlement): 150 से ज़्यादा जगहों पर निगरानी का दावा!
जहां एक तरफ खरीद का बजट बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ कागजों पर ‘अच्छा प्रशासन’ दिखाने के लिए AMC ने दावा किया है कि मॉनसून और भारी बारिश को देखते हुए अहमदाबाद में 150 से ज़्यादा संभावित धंसाव वाली जगहों (सड़कों पर बैठने/धंसने वाली जगहें) की लगातार निगरानी की जा रही है। ऐसी खबरें हैं कि प्रशासन इन इलाकों में गड्ढे भरने और पानी डालने का काम कर रहा है।
लेकिन सच्चाई यह है कि हर साल मॉनसून में अहमदाबाद की सड़कें बह जाती हैं और लोग गड्ढों और कीचड़ में फंसे रहते हैं। पक्को गुजरात न्यूज़ ओपिनियन:
जहां आम अहमदाबादवासी अपने टैक्स के बदले अच्छी सड़कें, साफ़ पानी और बाढ़ से राहत जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए गुहार लगा रहा है, वहीं शासक अपनी सुख-सुविधाएं बढ़ाने में लगे हैं। अगर सरकारी अधिकारियों और पार्षदों को महंगे मोबाइल फ़ोन और लैपटॉप देने का मकसद ज़मीनी स्तर पर काम में सुधार लाना होता, तो जनता खुश होती; लेकिन यहां तो ‘पैसा जनता का और मज़ा पार्टी नेताओं का’ वाला पैटर्न बन गया है। इन डिजिटल साधनों के मिलने के बाद भी अगर अहमदाबाद की सड़कें गड्ढों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से भरी रहती हैं, तो यह तय है कि जनता इन नेताओं की जमकर क्लास लगाएगी!

