मुंबईकरों को लगातार हो रही बारिश के थमने से राहत मिली है। हालांकि बारिश थमने के कारण तापमान बढ़ने की संभावना है। गुरुवार को मुंबई के अधिकतम तापमान में यह बदलाव तुरंत देखा गया। मौसम विभाग ने आने वाले दो सप्ताह के लिए पूर्वानुमान जारी किए हैं।
मुंबई: मुंबईकरों समेत पूरे महाराष्ट्र के लिए राहत भरी खबर है। राज्य में बारिश की रफ्तार कम हो गई है। इसकी घोषणा मौसम विभाग ने की है। दरअसल गुरुवार को पूरे भारत में मॉनसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा की गई। इससे राहत और खुशी तो मिली, लेकिन अगले दो सप्ताह के पूर्वानुमान बताते हैं कि महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों में बारिश की रफ्तार धीमी रहेगी। कोंकण डिवीजन में 23 जुलाई तक औसत से कम बारिश होने की उम्मीद है।
मौसम विभाग ने क्या कहा?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के दो सप्ताह के पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य में 23 जुलाई तक हल्की बारिश होने की संभावना है और इस दौरान बारिश औसत से काफी कम रहेगी। 23 जुलाई से 30 जुलाई के बीच दक्षिण कोंकण के कुछ इलाकों में बारिश की रफ्तार बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इस बारे में साफ तस्वीर 16 जुलाई तक सामने आने की उम्मीद है। पहले सप्ताह (9-16 जुलाई) के दौरान विदर्भ के कुछ इलाकों में औसत से ज्यादा बारिश हो सकती है।
उत्तर, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में कैसी बारिश?
इसी तरह 16 जुलाई से 23 जुलाई के बीच उत्तर-मध्य महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर औसत से ज्यादा बारिश हो सकती है। हालांकि मौजूदा मॉडल बताते हैं कि यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं होगा। क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने 13 जुलाई तक कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा डिवीजन में हल्की बारिश का पूर्वानुमान लगाया है।
बारिश के बाद तापमान बढ़ा
कोंकण डिवीजन में बारिश की रफ्तार कम होने के तुरंत बाद गुरुवार को तापमान में बढ़ोतरी देखी गई। अलीबाग में अधिकतम तापमान सामान्य से 2.9 डिग्री सेल्सियस ज्यादा दर्ज किया गया। मुंबई में भी अधिकतम तापमान 30 डिग्री के पार चला गया। कोलाबा में 30.5°C और सांताक्रूज में 31.4°C तापमान दर्ज किया गया।
मुंबई लोकल ट्रेनों में रुकावट
वसई-विरार सेक्शन में भारी बारिश और उसके बाद जलभराव के कारण मुंबई की लोकल और लंबी दूरी की ट्रेन सेवाओं में बड़ी रुकावटें आईं। वेस्टर्न रेलवे ने पानी जमा होने से रोकने के लिए पटरियों की ऊंचाई बढ़ाने का फैसला किया है। वेस्टर्न रेलवे के जनरल मैनेजर रामाश्रय पांडे ने हाल ही में डिवीन का निरीक्षण किया और रेलवे अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए।
वेस्टर्न रेलवे की क्या तैयारी?
पटरियों पर पानी भरने के कारण लोकल ट्रेन सेवाएं सामान्य चर्चगेट-विरार-चर्चगेट रूट के बजाय चर्चगेट-वसई रोड-चर्चगेट रूट तक ही सीमित कर दी गईं। लंबी दूरी की ट्रेनें भी बुरी तरह प्रभावित हुईं और वेस्टर्न रेलवे का लोकल ट्रेन शेड्यूल तीन दिनों तक पूरी तरह से बाधित रहा। वसई और विरार के बीच स्थित नालासोपारा स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पूरी तरह से पानी में डूब गए थे। इसलिए, नालासोपारा स्टेशन पर बाढ़ से निपटने के उपाय दो चरणों में लागू किए जाएंगे। शॉर्ट-टर्म (कम समय के लिए) और लॉन्ग-टर्म (लंबे समय के लिए)। पहले चरण में रेलवे ट्रैक की ऊंचाई 50 मिमी बढ़ाई जाएगी। दूसरे चरण में ट्रैक की ऊंचाई कुल 400 मिमी बढ़ाई जाएगी। दूसरे चरण को पूरा करने के लिए प्लेटफॉर्म, प्लेटफॉर्म की छत, ओवरहेड तारों और संबंधित उपकरणों में बड़े बदलाव करने होंगे।
ट्रैक की ऊंचाई बढ़ाने से क्या फायदा?
ट्रैक की ऊंचाई 50 मिमी बढ़ाने के शॉर्ट-टर्म उपाय को पूरा करने के लिए जुलाई के आखिर तक की समय-सीमा तय की गई है। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि दूसरे चरण में बहुत ज्यादा काम करना होगा और इसमें काफी समय लगने की संभावना है। इस बीच, वेस्टर्न रेलवे ने दावा किया है कि मॉनसून से पहले की तैयारियों के तहत माटुंगा रोड स्टेशन पर ट्रैक की ऊंचाई बढ़ाना फायदेमंद साबित हुआ है।

