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ठगी करना इतना आसान है? मोबाइल ऐप बनाया, लोन का ऑफर दिया और कर दिया 200 करोड़ का खेल

ऑनलाइन करोड़ों रुपये की ठगी की नई कहानी महाराष्ट्र के नागपुर से सामने आई है. यहां ‘मस्त मनी’ नाम के एक मोबाइल ऐप ने करीब 5 लाख लोगों को जाल में फंसाया और कथित तौर पर 200 करोड़ रुपये का खेल कर डाला. नागपुर पुलिस ने भोपाल से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया है, जिस पर आरोप है कि उसी ने ये ऐप तैयार किया था.

मोबाइल पर आया एक विज्ञापन… कुछ ही मिनटों में बिना कागजों के 15 हजार रुपये तक का लोन मिलने का दावा… और इसी के बाद ब्लैकमेलिंग का खेल शुरू होता था. ‘मस्त मनी’ नाम के एक मोबाइल ऐप ने देशभर में करीब 5 लाख लोगों को इसी जाल में फंसाया. नागपुर पुलिस का कहना है कि इस ऐप के जरिए करीब 200 करोड़ रुपये की ठगी की गई. इसी केस में भोपाल से एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को गिरफ्तार किया गया है.

आजकल इंस्टेंट लोन देने वाले मोबाइल ऐप्स की भरमार है. जरूरत पड़ने पर लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे इन्हें डाउनलोड कर लेते हैं. लेकिन कई बार यही जल्दबाजी लाखों रुपये का नुकसान और मानसिक प्रताड़ना की वजह बन जाती है. ऐसा ही मामला ‘मस्त मनी’ ऐप से जुड़ा सामने आया है. नागपुर पुलिस की साइबर सेल ने एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया है, जिसने ऑनलाइन लोन के नाम पर देशभर में करीब 5 लाख लोगों से 200 करोड़ की ठगी करने का आरोप है.

इस मामले में पुलिस ने मध्य प्रदेश के भोपाल के रहने वाले कामिल सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है. पुलिस के अनुसार, वह पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसी ने ऐप तैयार किया था. पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर इस ऐप का जमकर प्रचार किया जाता था.

विज्ञापनों में दावा किया जाता था कि कुछ ही मिनटों में 15 हजार रुपये तक का इंस्टेंट लोन मिल जाएगा. आसान प्रॉसेस और तुरंत पैसे मिलने के लालच में बड़ी संख्या में लोगों ने ऐप डाउनलोड किया और लोन के लिए आवेदन किया. यहीं से ठगी का खेल शुरू हो जाता था.

जांच में सामने आया है कि ऐप इंस्टॉल करते ही पीड़ितों का मोबाइल का डेटा, कॉन्टैक्ट लिस्ट और अन्य जरूरी जानकारी गैंग के पास चली जाती थी. इसके बाद लोगों को लोन तो दिया जाता था, लेकिन उसके बदले 15 हजार रुपये के लोन पर 25 हजार से 50 हजार रुपये तक की वसूली की जाती थी.

अगर कोई पैसे देने से मना करता या देरी करता, तो उसे उसकी तस्वीरें, मोबाइल कॉन्टैक्ट और व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल करने या रिश्तेदारों और दोस्तों को भेजने की धमकी दी जाती थी. यानी यह सिर्फ ऊंचे ब्याज का मामला नहीं था, बल्कि डिजिटल ब्लैकमेलिंग का नेटवर्क था.

दो शिकायतों से खुली पूरे रैकेट की परतें

नागपुर के दो लोगों ने साइबर पुलिस से शिकायत की कि लोन ऐप के नाम पर उनसे ठगी और ब्लैकमेलिंग की जा रही है. इन्हीं शिकायतों के आधार पर साइबर पुलिस ने जांच शुरू की. डिजिटल ट्रेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की मदद से पुलिस भोपाल तक पहुंची और वहां से आरोपी कामिल सिद्दीकी को अरेस्ट कर लिया.

पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में साफ हो गया है कि यह काम किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि एक गैंग का है. अब यह पता लगाया जा रहा है कि ऐप का संचालन कौन-कौन कर रहा था, ठगी का पैसा किन खातों में भेजा जाता था और इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है.

साथ ही पुलिस डिजिटल लेन-देन और बैंक खातों की भी जांच कर रही है, ताकि ठगी की रकम का पूरा हिसाब सामने आ सके. साइबर विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि किसी भी अनजान लोन ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी वैधता की जांच जरूर करें. मोबाइल ऐप को कॉन्टैक्ट, गैलरी और अन्य निजी जानकारी की अनुमति देने से पहले सोचें, क्योंकि यही जानकारी बाद में ब्लैकमेलिंग का हथियार बन सकती है.

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