आज हमारे पास मोबाइल या कंप्यूटर हो, तो हम समय-समय पर उसका सॉफ्टवेयर अपडेट करते रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हमारा यह शरीर और मन भी एक बहुत बड़े और सुपर-फास्ट सॉफ्टवेयर पर काम करता है? हमारा यह जीवन और कुछ नहीं, बल्कि हमारे पिछले जन्म का एक अदृश्य सॉफ्टवेयर है, जो हमारे भीतर लगातार चल रहा है।
जब हम इस दुनिया में जन्म लेते हैं, तब हमारा मन बिल्कुल कोरी स्लेट जैसा नहीं होता। हम अपने साथ पुरानी आदतें, संस्कार और कर्मों का एक बहुत बड़ा
बैकअप लेकर आते हैं।
यह सॉफ्टवेयर हमारे जीवन में कैसे काम करता है, आइए इसे बहुत सरल भाषा में समझते हैं:
- चित्त: हमारे भीतर की ‘हार्ड डिस्क’
कंप्यूटर में जैसे सारा पुराना डेटा सुरक्षित रखने के लिए एक हार्ड डिस्क होती है, वैसे ही हमारे भीतर ‘चित्त’ नाम की एक हार्ड डिस्क है। पिछले कई जन्मों में हमने जो कुछ भी अच्छा-बुरा किया है, देखा है या अनुभव किया है, वह सब कुछ इसमें सेव (Save) हो जाता है।
कई बार हम किसी बिल्कुल अनजान जगह पर पहली बार जाते हैं, फिर भी अंदर से ऐसा लगता है कि “मैं यहाँ पहले भी आ चुका हूँ।” या कोई बिल्कुल अजनबी व्यक्ति हमें पहली ही मुलाकात में बहुत प्यारा लगने लगता है, उसके साथ एक पवित्र और निस्वार्थ मित्रता (सख्य भाव) बन जाती है। यह और कुछ नहीं, बल्कि हमारी पुरानी हार्ड डिस्क से किसी फाइल के अचानक ‘लोड’ होने का संकेत है।
- संस्कार: मोबाइल की ‘प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स’
जब हम नया मोबाइल खरीदते हैं, तो उसमें वॉट्सऐप या कैमरे जैसी कुछ ऐप्स पहले से ही डाउनलोड की हुई आती हैं। बस, ठीक उसी तरह हमारे भीतर भी कुछ आदतें और प्रतिभाएं पहले से ही डाउनलोड की हुई होती हैं।
आपने देखा होगा कि दो सगे भाई-बहन एक ही घर में, एक ही माता-पिता के पास बड़े होते हैं, फिर भी दोनों का स्वभाव बिल्कुल अलग होता है। कोई बच्चा बचपन से ही सुंदर लिखने लगता है, कोई खेल के मैदान में मेडल जीतने के लिए दौड़ने लगता है, तो किसी बच्चे के दिल में मूक पशु-पक्षियों के प्रति अपार करुणा और ‘जीव दया’ का भाव होता है। यह सब पूर्वजन्म की कमाई है, जो इस जन्म में अपने आप हमारे साथ आती है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण भी कहते हैं कि पूर्वजन्म के संस्कार मनुष्य को अपने आप अच्छे मार्ग की ओर खींच ले जाते हैं।
- कर्म का गणित: जैसा इनपुट, वैसा आउटपुट
कोई भी सॉफ्टवेयर एक नियम पर चलता है कंप्यूटर में जैसा टाइप करोगे, स्क्रीन पर वैसा ही दिखेगा। हमारा कर्मों का सिद्धांत भी ऐसा ही है।
हमारे शास्त्र कहते हैं कि हमारे कर्म तीन भागों में बंटे हुए हैं:
संचित कर्म (बड़ा स्टोरेज): हमारे सभी जन्मों के पुण्य और पाप का पूरा हिसाब-किताब।
प्रारब्ध कर्म (भाग्य):उस बड़े हिसाब में से जितना हिस्सा हमें इस जन्म में भोगने के लिए मिला है, वह। जीवन में आने वाले सुख-दुख या परिस्थितियां इसी प्रारब्ध के कारण सामने आती हैं।
आगामी कर्म (लाइव कोडिंग): यह सबसे महत्वपूर्ण है! आज वर्तमान में हम जो नए और अच्छे कार्य करते हैं, वह हमारी ‘लाइव कोडिंग’ है। इससे हमारा भविष्य बदलता है।
भले ही सॉफ्टवेयर (भाग्य) पिछले जन्म का हो, लेकिन इसे फिर से लिखने का कीबोर्ड (पुरुषार्थ/मेहनत) आज भी हमारे हाथ में है। मनुष्य का चरित्र (किरदार) ऐसा होना चाहिए कि चाहे जैसी भी मुसीबत आए, अंदर का सॉफ्टवेयर कभी क्रैश (Crash) न हो।
सॉफ्टवेयर को ‘अपग्रेड’ कैसे करें?
इस विषय को समझने का अर्थ यह नहीं है कि हम भाग्य के भरोसे बैठ जाएं। यह तो हमें जगाने के लिए है.
नकारात्मकता के वायरस डिलीट करें:गुस्सा, ईर्ष्या और स्वार्थ उस वायरस की तरह हैं जो हमारा जीवन बर्बाद करते हैं। अच्छे विचारों से इन्हें रोज साफ करें।
सत्कर्म का नया डेटा जोड़ें:रोज कोई अच्छी किताब पढ़ें, किसी की मदद करें और पशु-पक्षियों के प्रति दया का भाव रखें। यह सब आपकी आत्मा के खाते में ‘नए अपडेट’ के रूप में जमा होता है।
हंसते हुए सामना करें जीवन में कभी कोई मुश्किल या अन्याय जैसी स्थिति बने, तब हिम्मत हारने के बजाय मुस्कुराते हुए उसका सामना करें; क्योंकि वह हमारा ही कोई पुराना हिसाब चुकता हो रहा है।
अंत में बस इतना ही…
पोशाक बदले जैसे यहाँ सिर्फ काया बदलती है,
बाकी आत्मा का सॉफ्टवेयर तो भवोभव (हर जन्म) साथ चलता है।
मृत्यु तो केवल ‘हार्डवेयर’ बदलने की एक प्रक्रिया है, बाकी यह आत्मा तो अपने संस्कारों के साथ ही सफर करती है। हम अपना शरीर बदल सकते हैं, लेकिन आत्मा का सॉफ्टवेयर हमेशा हमारे साथ यात्रा करता है। आइए, आज ही अपने अच्छे विचारों और कड़ी मेहनत के दम पर इस सॉफ्टवेयर को इतना सुंदर बना दें कि हमारा जीवन पूरे समाज के लिए प्रेरणा का झरना बन जाए!
दर्शना पटेल (नेशनल मेडलिस्ट) स्पोर्ट्स टीचर.

