दुनिया की जियोपॉलिटिक्स और तेल बाज़ार से एक बहुत चौंकाने वाली खबर आ रही है। रूस, जिससे भारत समेत दुनिया के कई देश सस्ता कच्चा तेल खरीदते हैं, आज पड़ोसी देश बेलारूस से तेल खरीदने को मजबूर है! दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक अचानक तेल आयातक कैसे बन गया? क्या यूक्रेन के साथ युद्ध में रूस की सभी रिफाइनरियां नष्ट हो गई हैं? आइए, ‘पक्को गुजरात न्यूज़’ के आज के एक्सप्लेनर में इस पूरे मामले को समझते हैं।
यूक्रेन का घातक ‘ड्रोन हमला’: रूस की अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई
असल में, पिछले कुछ महीनों में यूक्रेन ने रूस के खिलाफ अपनी युद्ध रणनीति बदल दी है। यूक्रेन ने अब रूसी सैनिकों पर हमला करने के बजाय रूस की आय के मुख्य स्रोत, यानी उसके तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। यूक्रेन ने रूस के अंदर घुसकर उसकी प्रमुख तेल रिफाइनरियों और स्टोरेज डिपो पर कई घातक ड्रोन हमले किए हैं।
अनुमानित नुकसान: इन ड्रोन हमलों में रूस की कई रिफाइनरियां या तो जलकर राख हो गई हैं या उन्होंने काम करना बंद कर दिया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, रूस की तेल रिफाइनिंग क्षमता में 10% से 14% की भारी कमी आई है।
अगर रिफाइनरियां नष्ट हो गईं, तो कच्चे तेल का क्या हुआ?
यहां समझने वाली बात यह है कि रूस के पास बहुत सारा ‘कच्चा तेल’ उपलब्ध है और वह इसे लगातार भारत को बेच भी रहा है। लेकिन समस्या यह है कि कच्चे तेल को गाड़ियों में इस्तेमाल के लायक बनाने के लिए ‘रिफाइनरी’ की ज़रूरत होती है। यूक्रेन के हमले में रूस की ये रिफाइनरियां नष्ट हो गई हैं। नतीजतन, कच्चा तेल होने के बावजूद रूस अपने देश के लिए पर्याप्त पेट्रोल और डीज़ल प्रोसेस नहीं कर पा रहा है।
रूस में पेट्रोल और डीज़ल की कमी और महंगाई का डर
अपने देश में पेट्रोल और डीज़ल की कमी को रोकने और युद्ध के समय सेना की गाड़ियों और टैंकों को बीच रास्ते में रुकने से बचाने के लिए पुतिन सरकार ने दो बड़े कदम उठाए हैं:
- निर्यात पर रोक: रूस ने निकट भविष्य के लिए अपने देश से पेट्रोल के निर्यात पर पूरी तरह रोक लगा दी है, ताकि घरेलू स्तर पर कोई कमी न हो।
- बेलारूस से आयात: रूस ने अपने पड़ोसी और सबसे अच्छे दोस्त बेलारूस से तुरंत प्रभाव से प्रोसेस्ड पेट्रोल और डीज़ल खरीदना शुरू कर दिया है। पक्को
गुजरात न्यूज़ का विश्लेषण: भारत पर क्या असर होगा?
भारत सुरक्षित स्थिति में है: भारत रूस से ‘कच्चा तेल’ (crude oil) खरीदता है, पेट्रोल और डीज़ल नहीं। भारत के पास अपनी विश्व-स्तरीय रिफाइनरियां (जैसे जामनगर रिफाइनरी) हैं। इसलिए, रूसी रिफाइनरियों के बंद होने से भारत को होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई में किसी बड़ी रुकावट की संभावना नहीं है।
युद्ध में एक नया मोड़: यूक्रेन के इस आर्थिक हमले ने यह साबित कर दिया है कि वह रूस को युद्ध के मैदान में हराने के बजाय, उसे आर्थिक रूप से कंगाल करके घुटनों पर लाना चाहता है।
यह स्थिति महाशक्ति रूस के लिए निश्चित रूप से शर्मनाक और चिंताजनक है। जो देश पूरी दुनिया को ईंधन की सप्लाई करता है, उसे आज अपने ही घर में दीये जलाने के लिए दूसरों से तेल मांगना पड़ रहा है!

