Iran-Israel War: ईरान-इज़राइल संघर्ष का असर अब भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र पर भी दिखने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस तनाव के चलते भारत में इलाज महंगा होने और स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है। सबसे बड़ा खतरा मेडिकल डायग्नोसिस, खास तौर पर एमआरआई सेवाओं, कैंसर पहचान और न्यूरोलॉजिकल निदान पर मंडरा रहा है।
मध्य पूर्व की घटनाओं के कारण वैश्विक स्तर पर हीलियम गैस की आपूर्ति बाधित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट जारी रहा, तो भारत में एमआरआई स्कैन की लागत बढ़ सकती है और निदान प्रक्रिया में देरी के साथ-साथ सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। कतर, जो वैश्विक हीलियम उत्पादन का लगभग एक तिहाई हिस्सा प्रदान करता है, ने हाल ही में ईरान के हमलों के बाद अपने तरलीकृत हीलियम संयंत्र बंद कर दिए हैं और ‘बल मेजर’ की घोषणा की है। इसका अर्थ है कि कतर अपने अनुबंधित ग्राहकों को हीलियम की आपूर्ति नहीं कर सकेगा।
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हीलियम मेडिकल क्षेत्र के लिए खासतौर पर एमआरआई मशीनों के लिए बेहद जरूरी है। यह गैस मशीन के सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स को -269 डिग्री सेल्सियस के करीब ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल होती है, जिससे मशीनें सही प्रकार से कार्य कर पाती हैं। बिना हीलियम के, एमआरआई स्कैनर काम नहीं कर सकते। एक सामान्य एमआरआई मशीन को अल्ट्रा-कोल्ड वातावरण बनाए रखने के लिए अक्सर 1,500 लीटर से अधिक तरल हीलियम की जरूरत होती है।
एमआरआई मशीनों में हीलियम का तीन प्रमुख कार्यों में इस्तेमाल होता है—सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट्स को ठंडा रखना, चुंबकीय क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखना और मशीन की विफलता रोकना। यदि हीलियम का स्तर गिरता है, तो मशीन का मैग्नेट गर्म हो सकता है जिसे ‘क्वेंच’ कहा जाता है, इससे मशीन बंद हो जाती है और महंगी मरम्मत की जरूरत पड़ती है। हालांकि आधुनिक मशीनें हीलियम को पुनर्चक्रित करने की कोशिश करती हैं, फिर भी अस्पतालों को समय-समय पर उसे फिर से भरना होता है।
दूसरी ओर, इंस्टाग्राम पर साझा पोस्ट के अनुसार, ईरान संघर्ष के चलते कंटेनर शिप्स की कमी और चीन से आवश्यक कच्चे माल की आपूर्ति में देरी के कारण भारतीय दवा कंपनियों के लिए कच्चे माल की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। इससे दवाओं की कीमतों में तेज उछाल आने की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सप्लाई चेन में बाधा और कच्चे माल की उपलब्धता में कमी से भारतीय बाजार में दवा की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि हीलियम की कमी और दवा महंगी होने की स्थिति बनी रही, तो देश के बड़े अस्पतालों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी मरीजों को इलाज के लिए ज्यादा पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। साथ ही, एमआरआई जैसी महत्वपूर्ण जांच सेवाओं तक आम लोगों की पहुंच भी सीमित हो सकती है।
जानकारों के अनुसार, मौजूदा हालात में भारत को अपनी स्वास्थ्य सेवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की जरूरत है ताकि वैश्विक संकट का असर कम से कम हो। फिलहाल, हीलियम आपूर्ति और दवाओं की कीमतों पर नजर रखी जा रही है और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संस्थान स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

