BJP के बड़े नेताओं को अंधेरे में रखकर गंभीर मामला दर्ज करवाया गया
अंबाजी: खुद को भारतीय जनता पार्टी (BJP) कहने वाली अंबाजी में मतभेद देखने को मिला है।
सूत्रों के मुताबिक, जिनके बायोडेटा में पार्टी के प्रति वफादारी से ज़्यादा ‘दागी’ रिकॉर्ड है, उन्हें ज़िला BJP ने रेड कार्पेट बिछा दिया है। आमतौर पर BJP में एक छोटा सा पद पाने के लिए भी तीन पीढ़ियों के नेताओं और संगठन की अग्निपरीक्षा से गुज़रना पड़ता है। लेकिन अंबाजी में कुछ ऐसे ‘चमत्कारी गुरु’ एक्टिव हो गए हैं जिन्होंने बनासकांठा ज़िला BJP के मौड़ी मंडल की आंखों पर पट्टी बांध दी है। पार्टी के अंदर चर्चा है कि, “पार्टी की नाकामी के पीछे किस बड़े सिर का हाथ है?”
ये वो नेता हैं जो अपने निजी फ़ायदों के लिए पार्टी के उसूलों को अपनी जेब में रखे हुए हैं। भले ही हाईकमान राष्ट्रवाद और भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात कर रहा हो, लेकिन ऐसा लगता है कि अंबाजी में ‘दाग अच्छे हैं’ की पॉलिसी चल रही है। सच्चे कार्यकर्ता जो सालों से पार्टी का झंडा लेकर चल रहे हैं, कड़ी धूप में मीटिंग के लिए कुर्सियां लगा रहे हैं और ज़मीनी काम कर रहे हैं, वे इन नियुक्तियों से नाराज़ हैं। नाम न बताने की शर्त पर एक कार्यकर्ता ने मज़ाक में कहा: “हम यहां सिर्फ़ पार्टी के नारे लगाने आए हैं। सबसे अच्छे तो वही होंगे जो कानून के पक्ष में हों या जो बड़े नेताओं के पैर छूते हों!” दिन-रात अनुशासन सिखाने वाला पार्टी का मैदानी मोर्चा और युवा मोर्चा नियुक्तियों के दौरान हैरान क्यों था? अब देखना यह है कि राज्य BJP इस ‘गलत’ ढांचे पर कोई कार्रवाई करती है या ‘हर ज़मीन गोपाल है!’ सोचकर आंखें मूंद लेती है।

