हेमंत वर्मा विशेष संवाददाता राजनंदगांव : छत्तीसगढ़ की भिलाई से लगी हुई गनियारी में पली बढ़ी पद्म विभूषण तीजन बाई का आज अवसान हो गया तीजन बाई के निधन पर देश के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री केंद्रीय मंत्री मुख्यमंत्री राज्यपाल से लेकर तमाम राजनीतिक व्यक्तियों ने गहरा संवेदना व्यक्त किया है तीजन बाई छत्तीसगढ़ की एकमात्र ऐसी कलाकार रही है जिन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया तीजन बाई ने विगत कई दशकों से छत्तीसगढ़ के लोगों का महाभारत की कथाओं का पंडवानी के माध्यम से वाचन कर जनमानस में अमिट छाप छोड़ी पंडवानी विधा दरअसल महाभारत की कथाओं पर पंडवानी शैली में यानी की गीत संगीत के माध्यम से जीवंत अभिनय करना पंडवानी कहा जाता है पंडवानी के दो मुख्य विधा है पहली काल्पनिक शैली दूसरा है वेदमाती शैली काल्पनिक शैली यानी की कथा शास्त्रों से ही लिया गया है
लेकिन कुछ बातें उसमें मनोरंजन के हिसाब काल्पनिक शैली में उदाहरण देकर समझाया जाता है इस पर तीजन बाई का जबरदस्त पकड़ रहा वह प्रस्तुति ऐसे देते थे जैसे महाभारत का कोई कलाकार पर्दे पर जीवंत अभिनय कर रहा हो इसी तरीके से वेदमाती शैली जो की महाभारत शास्त्र पर आधारित है इसमें भी तीजन बाई की जबरदस्त पकड़ रही है दोनों शैली में पंडवानी में जबरदस्त पकड़ देश के लोग उनकी पंडवानी को बड़े चाव से सुनते ही थे लेकिन विदेशों में भी पंडवानी को लोग बड़े शौक से सुनते थे जब तीजन बाई भीमसेन की ललकार को जब बताते थे तो हाल तालियों से गूंजता था छत्तीसगढ़ में वैसे तो पंडवानी के और भी बहुत बड़े कलाकार हुए हैं लेकिन तीजन बाई जैसे पंडवानी गायिका संभवतः ना पहले हो पाया है ना भविष्य में हो पाएगा तीजन बाई का जाना मतलब पंडवानी के एक युग का खत्म हो जाना निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ की आन-बान शान कहे जाने वाली तीजन बाई ने वैश्विक स्तर पर पूरे छत्तीसगढ़ का मान सम्मान बढ़ाया है अब वह तमूरा की तान और वह भीमसेन की दहाड़ कभी सुनने को नहीं मिल पाएगा हेमंत वर्मा की कलम से

