दिल्ली सरकार ने सीएजी को तीन बिजली कंपनियों के खातों के ऑडिट का निर्देश दिया है। सीएजी को यह काम तीन महीने में करने को कहा गया है। वहीं, बिजली वितरण कंपनी का कहना है कि सीएजी ऑडिट का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। बीजेपी ने आम आदमी पार्टी पर बिजली कंपनियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी की दिल्ली सरकार ने दिल्ली में बिजली सप्लाई करने वाली बिजली वितरण कंपनियों के खातों का सीएजी ऑडिट का आदेश दिया है। सीएजी को यह काम तीन महीने में करने को कहा गया है। बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियों को आदेश दिया गया है कि ऑडिट के दौरान वह बकाया रेगुलेटरी असेट्स उपभोक्ताओं से न वसूल करें। साउथ, वेस्ट, सेंट्रल और ट्रांस यमुना इलाके में बिजली सप्लाई करने वाली बिजली कंपनी की याचिका हाई कोर्ट में खारिज होने के बाद सरकार ने यह पहल की है। इस मामले में बिजली वितरण कंपनी का कहना है कि सीएजी ऑडिट का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। इसलिए मामले में किसी भी प्रकार की टिप्पणी उचित नहीं है।
सीएजी ऑडिट पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम
दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियों के खाते का सीएजी ऑडिट पावर इन्फ्रा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दिल्ली के पावर कंस्यूमर्स और टैक्स पेयर्स की जीत है। उन्होंने कहा कि पावर सेक्टर के निजीकरण के बाद कई साल तक वित्तीय निर्णय, व्यवस्थाएं और लगातार बढ़ती देनदारियों की कभी जांच नहीं हो सकी थी। 10-11 साल तक सत्ता में रही आम आदमी पार्टी ने व्यवस्थाओं की जांच करने के बाद उसे संरक्षण दिया।
दिल्ली के लोगों की सच्चाई का पता चलेगा: आशीष सूद
सूद ने कहा कि जो काम पिछली सरकारे नहीं कर पाई, उसे बीजेपी सरकार ने महज कुछ महीनों में ही कर दिखाया है। दिल्ली के लोगों को यह जानने का पूरा हक है कि कुछ सौ करोड़ रुपये का रेगुलेटरी एसेट्स बढ़कर 38,000 करोड़ रुपये कैसे हो गया? इसका लाभ किसे मिला और लोगों पर इसका बोझ क्यों? उन्होंने कहा कि बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियों से यह अपेक्षा है कि वह पर्याप्त रेकॉर्ड सीएजी को उपलब्ध कराएं, ताकि ऑडिट का काम तेजी से हो सके।
तीन बिजली कंपनियों के खाते ऑडिट करने को तैयार
दिल्ली सरकार के कहने पर सीएजी भी बिजली सप्लाई करने वाली तीनों बिजली कंपनियों के खातों का ऑडिट करने को तैयार है। सीएजी के अधिकारियों ने तीनों कंपनियों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा था। 22 जून को बिजली कंपनियों के प्रतिनिधि व्यक्तिगत सुनवाई में हाजिर भी हुए। इस दौरान सीएजी अफसरों ने प्रतिनिधियों को आदेश दिया कि ऑडिट के लिए वह अपने खातों और रेगुलेटरी एसेट्स संबंधित पर्याप्त रेकॉर्ड सीएजी को उपलब्ध कराएं। ऑडिट तीन महीनों में कंप्लीट करने का लक्ष्य रखा गया है।

