अहमदाबाद ट्रांसफर होने के बाद भी केवल वेकरिया किस ‘जुगाड़’ से टिके रहे? मुख्य सिंडिकेटर मुकेश बारोट और जयेश रबारी की जुगलबंदी ने पूरे जिले को सट्टेबाजों-तस्करों के हवाले किया!
महानगर मेट्रो विशेष खोजी रिपोर्ट | नडियाद : नडियाद सहित पूरे खेड़ा जिले की कानून-व्यवस्था इस समय पूरी तरह भगवान भरोसे है। जिस लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) पर जिले में अपराध और अपराधियों को कुचलने की मुख्य जिम्मेदारी है, वह आज जनता की नजरों में ‘लोकल करप्शन ब्रांच’ बन चुकी है। जून महीने के ऑन-रिकॉर्ड आंकड़ों को मीडिया में चमकाकर अपनी पीठ थपथपाने वाली खेड़ा एलसीबी का असली चेहरा यदि रेंज आईजी या राज्य के डीजीपी निष्पक्षता से जांच लें, तो खाकी की आड़ में चल रहे इस संगठित काले साम्राज्य का ऐसा सनसनीखेज पर्दाफाश होगा कि पूरा महकमा दहल उठेगा। चर्चा है कि स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) के ताबड़तोड़ छापों से अपनी खाल बचाने और उच्च अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए ही एलसीबी ने इस तथाकथित ‘विशेष परफॉर्मेंस’ का ढोंग रचा है।
तबादला रद्द होने का रहस्य क्या? वेकरिया-बारोट की अटूट ‘सिंडिकेट’
खेड़ा पुलिस महकमे में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह उठ रहा है कि एलसीबी में पिछले करीब 5 से 6 साल से जमे बैठे पुलिस इंस्पेक्टर के.आर. वेकरिया का जब अहमदाबाद ट्रांसफर कर दिया गया था, तो ऐसी कौन सी राजनीतिक छत्रछाया या ‘आर्थिक महासेटिंग’ थी जिसके दम पर उनका तबादला रद्द हो गया और वे ठोक-बजाकर फिर से उसी मलाईदार सीट पर बैठ गए? इतना ही नहीं, एलसीबी में सेकंड पीआई के तौर पर जिले के मुख्य ‘वहीवटदार’ (लेनदेन के सिंडिकेटर) माने जाने वाले मुकेश बारोट को खुफिया पोस्टिंग देकर पूरे जिले में व्यवस्थित तरीके से भ्रष्टाचार की एक ऐसी सिंडिकेट बना दी गई है, जो सीधे एसपी विजय पटेल के सिर पर बैठकर राज कर रही है।
चेन स्नैचिंग और मातर फायरिंग केस में ‘जोड़-तोड़’ का गंदा खेल!
एलसीबी ने नडियाद पश्चिम इलाके में हुई चेन स्नैचिंग की वारदात को सुलझाने का बड़ा दावा ठोका है, लेकिन इस मामले में पर्दे के पीछे क्या खेल हुआ और कितने का लेन-देन हुआ, इसकी जांच हो तो चौंकाने वाले सच सामने आएंगे। ठीक इसी तरह, मातर में एक रिटायर्ड पीएसआई के घर पर हुए हमले और फायरिंग जैसी अति गंभीर वारदात को दबाने के पीछे भ्रष्ट वेकरिया, मुकेश बारोट और डिफॉल्टर जयेश रबारी ने पर्दे के पीछे रहकर क्या खिचड़ी पकाई? बुटलेगरों (शराब तस्करों) की गोदी में बैठे ये अफसर कानून-व्यवस्था को ताक पर रखकर अपराधियों को वीआईपी प्रोटेक्शन दे रहे हैं।
शराब की नदियों के बीच एलसीबी की ‘गांधीगिरी’, बड़े लट्ठाकांड की आशंका!
पूरे खेड़ा जिले की सीमाओं में देसी-विदेशी शराब की नदियां बह रही हैं, लेकिन एलसीबी ने अपनी पूरी जून महीने की बहादुरी में विदेशी शराब के सिर्फ 7 और देसी शराब का महज 1 केस दर्ज कर इतिश्री कर ली! इसके उलट, इसी जून महीने में स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) ने जिले में कितने बड़े छापे मारे, अगर उसका हिसाब निकाला जाए तो एलसीबी की निष्क्रियता की धज्जियां उड़ जाएंगी। वडताल का गुताल, चकलासी का चलाली, महेमदाबाद का बोडीरोजी, नडियाद टाउन का मलारपुरा व खाड, और कठलाल के काकरखाड से इन भ्रष्ट वहीवटदारों की शह पर देसी शराब की खेप ट्रेनों, बसों और निजी गाड़ियों के जरिए धड़ल्ले से अहमदाबाद और वडोदरा भेजी जा रही है। इस सिंडिकेट का यह लालच किसी दिन जिले में बड़े लट्ठाकांड (जहरीली शराब कांड) को दावत देगा, इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता।
सट्टा बाज़ारों से आंखें मूंदीं, हर महीने करोड़ों की वसूली का फिक्स नेटवर्क
चकलासी, महेमदाबाद, नडियाद टाउन और नडियाद रूरल की सरहदों में पुलिस की मेहरबानी से बड़े-बड़े जुए और सट्टे के अड्डे धमक रहे हैं, लेकिन एलसीबी ने जून में सट्टेबाजी और क्रिकेट सट्टे के नाम पर सिर्फ 5 केस दिखाकर अपनी ड्यूटी पूरी कर ली। असलियत यह है कि एलसीबी के शोपीस बन चुके पीआई केवल वेकरिया, मुकेश बारोट, पीएसआई चंपावत और टाउन के शातिर वहीवटदार सुभाष ने इस समय अवैध लेन-देन के लिए फर्जी अर्जियां (शिकायतें) खड़ी करवाकर ‘जोड़-तोड़’ की दुकानें खोल रखी हैं।
डीजीपी जी.एस. मलिक साहब! इस भ्रष्ट एलसीबी का विसर्जन कब?
गुजरात के ईमानदार और कड़क डीजीपी जी.एस. मलिक अगर खेड़ा एलसीबी के इन दोनों पीआई के.आर. वेकरिया और एम.जे. बारोट की सर्विस शीट मंगवा लें और उनके कार्यकाल में पड़े एसएमसी के छापों की लिस्ट देख लें, तो इस पूरी टीम को तत्काल सस्पेंड कर पूरी एलसीबी का विसर्जन करना पड़ जाएगा। कागजों पर खुद को शेर दिखाने वाली इस क्राइम ब्रांच की अगर किसी केंद्रीय एजेंसी से ‘मासिक हफ्ता वसूली’ की जांच करा ली जाए, तो भ्रष्टाचार का यह रेला डिफॉल्टर जयेश रबारी से शुरू होकर गांधीनगर के कई बड़े आकाओं के बंगलों तक पहुंचेगा!
मेट्रो का सीधा सवाल: खेड़ा जिले की जनता को अपराधियों, बुटलेगरों और सटोरियों के रहमोकरम पर छोड़ने वाले इन खाकीधारी माफियाओं पर राज्य सरकार कब हंटर चलाएगी?

