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सिद्धांतों का चीरहरण या करोड़ों का घोटाला? करजण में अक्षय पटेल का ‘दलबदलू’ इतिहास और रेत-मिट्टी खनन में रॉयल्टी चोरी का महापर्दाफाश!

महानगर मेट्रो विशेष खोजी रिपोर्ट | करजण : लोकतंत्र में मतदाता एक पवित्र उम्मीद के साथ वोट देता है, लेकिन जब कोई नेता अपने निजी स्वार्थ के लिए जनमत के टुकड़े-टुकड़े कर दे, तो जनता खुद को ठगा हुआ महसूस करती है। करजण विधानसभा सीट से विधायक अक्षय पटेल (अक्षयकुमार ईश्वरभाई पटेल) का राजनीतिक इतिहास किसी आदर्श जननायक का नहीं, बल्कि सत्ता के इर्द-गिर्द घूमने वाले, दलबदल करने वाले और अपने ही क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा को बेरहमी से लूटने वाले राजनेता का रहा है। आज करजण की जनता इनके अधूरे वादों और भ्रष्टाचार के इस खेल को देखकर आक्रोश में है।

2017 में जिस पार्टी के भरोसे जीते, 2020 में उसी की पीठ में घोंपा खंजर!

साल 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में करजण की जनता ने भाजपा शासन के खिलाफ गुस्सा दिखाते हुए अक्षय पटेल को कांग्रेस के टिकट पर जिताया था। जनता को उम्मीद थी कि अक्षय पटेल विपक्ष में रहकर सरकार के सामने जनता की आवाज बुलंद करेंगे। लेकिन, जून 2020 में राज्यसभा चुनाव आते ही अक्षय पटेल का ‘इमpath’ डगमगा गया। रातों-रात कांग्रेस और विधायकी पद से इस्तीफा देकर वे भाजपा की शरण में चले गए। यह कोई वैचारिक बदलाव नहीं था, बल्कि सत्ता की मलाई खाने की लालसा थी, जिसने करजण की जनता पर एक बेवजह के उपचुनाव का आर्थिक बोझ थोप दिया।

नदियों का सीना चीरा: रेत और मिट्टी खनन का खूनी खेल!

अक्षय पटेल के संरक्षण में आज करजण क्षेत्र में सबसे बड़ा काला कारोबार फल-फूल रहा है—अवैध रेत और मिट्टी का खनन! स्थानीय लोगों के गंभीर आरोपों के मुताबिक, विधायक की सीधी छत्रछाया में करजण की पवित्र नदियों और सरकारी जमीनों का सीना दिन-रात चीरा जा रहा है। अवैध रूप से चल रहीं हिताची मशीनें और ओवरलोडेड डंपर कुदरती संपदा को बेरहमी से निगल रहे हैं। यह तबाही सिर्फ पर्यावरण को ही नुकसान नहीं पहुंचा रही, बल्कि नदी किनारे बसे गांवों के अस्तित्व के लिए भी बड़ा खतरा बन चुकी है।

सरकारी खजाने पर डाका: करोड़ों रुपये की रॉयल्टी चोरी का सिंडिकेट!

इस अवैध खनन के पीछे सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं हो रहा, बल्कि सरकारी खजाने को भी करोड़ों रुपये का चूना लगाया जा रहा है। बिना किसी आधिकारिक मंजूरी या फिर नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर ‘रॉयल्टी चोरी’ का पूरा सिंडिकेट चलाया जा रहा है। सरकारी कागजों पर अंधेरा रखकर, बिना टैक्स और रॉयल्टी चुकाए करोड़ों रुपये सीधे निजी जेबों में जा रहे हैं। जो पैसा जनता के विकास, स्कूल और अस्पतालों के लिए इस्तेमाल होना चाहिए था, वह आज रॉयल्टी चोरी के रास्ते सिंडिकेट के आकाओं के घर पहुंच रहा है। इतना बड़ा घोटाला होने के बावजूद प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं, जिसका सीधा कारण है—विधायक का वरदहस्त!

किसानों और स्थानीय युवाओं के साथ सिर्फ छलावा?

अक्षय पटेल खुद को ‘किसान नेता’ बताते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि करजण-पोर क्षेत्र के किसान आज भी सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे हैं। अंधाधुंध अवैध खनन के कारण भूजल स्तर (वाटर लेवल) लगातार नीचे गिर रहा है, जिससे खेती बर्बाद हो रही है। इसके अलावा, क्षेत्र के उद्योगों में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को 85% नौकरी देने का नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। सत्तापक्ष का विधायक होने के बावजूद वे स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।

तानाशाही रवैया और मूल कार्यकर्ताओं में सुलगता आक्रोश!

भाजपा में शामिल होने के बाद भी अक्षय पटेल अपनी पुरानी तानाशाही आदतों को छोड़ नहीं पाए हैं। करजण भाजपा के जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ता आज इस ‘आयातित नेता’ के अहंकार और मनमानी से त्रस्त हैं। विकास के नाम पर सिर्फ अपनी पीठ थपथपाना, जर्जर सड़कों और खस्ताहाल स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली पर पर्दा डालना और खनन माफियाओं को खुली छूट देना ही अक्षय पटेल की राजनीति का असली चेहरा बन चुका है।

जनता कब तक सहेगी यह जुल्म?

पार्टी बदलकर और सत्ता के दम पर बार-बार चुनाव जीतना मुमकिन हो सकता है, लेकिन जनता के दिलों में जगह नहीं बनाई जा सकती। सिद्धांतों को ताक पर रखने वाली राजनीति और प्रकृति को लूटकर करोड़ों की रॉयल्टी चोरी करने वालों का हिसाब करजण की जनता आने वाले वक्त में जरूर चुकता करेगी, क्योंकि लोकतंत्र में आखिरी फैसला जनता की अदालत में ही होता है!

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