मानव रहित विमान तकनीक की मदद से दुपहिया वाहन मिला, मात्र 10 दिनों में अत्याधुनिक अभियान चलाकर मध्य प्रदेश के आदतन अपराधियों को पकड़ा गया
राजकोट में 2.49 करोड़ की लूट का 10 दिन में पर्दाफाश, राज्य निगरानी प्रकोष्ठ प्रमुख निर्लिप्त राय के दल ने मध्य प्रदेश से 3 आरोपियों को दबोचा।
खोज अभियान में अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग कर आरोपियों का दुपहिया वाहन खोजा गया।
‘महानगर मेट्रो’ का सवाल: इतनी बड़ी लूट के बाद स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र क्यों गहरी नींद में रहा?
राजकोट। राज्य निगरानी प्रकोष्ठ के ‘लौह पुरुष’ माने जाने वाले भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी निर्लिप्त राय के दल ने आखिरकार उन लुटेरों का घमंड तोड़ दिया, जिन्होंने राजकोट की धरती पर 2.49 करोड़ रुपये की बड़ी लूट को अंजाम देकर कानून को चुनौती दी थी। गुजरात पुलिस की प्रतिष्ठा से जुड़े इस मामले को मात्र 10 दिनों के कम समय में सुलझाकर पुलिस ने साबित कर दिया कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, वह कानून की लंबी पहुंच से बच नहीं सकता। राज्य निगरानी प्रकोष्ठ के 20 दलों ने लगातार अभियान चलाकर मध्य प्रदेश के सीहोर क्षेत्र से लुटेरों को गिरफ्तार किया और उन्हें कानून के दायरे में लाए। मैदान में 20 दल और आकाश से खोज अभियान: किसी चलचित्र अंदाज़ में सुलझा मामला!
मिली पक्की और ताज़ा जानकारी के अनुसार, राजकोट में करोड़ों की इस लूट के बाद गृह विभाग हरकत में आया और जांच राज्य निगरानी प्रकोष्ठ प्रमुख निर्लिप्त राय को सौंपी गई। सख्त अधिकारी की छवि रखने वाले निर्लिप्त राय ने तुरंत 20 अलग-अलग दल बनाए और गुजरात से लेकर मध्य प्रदेश तक जाल बिछाया। इस अभियान में निर्णायक मोड़ तब आया जब पुलिस ने उस दुपहिया वाहन को खोजने के लिए अत्याधुनिक तकनीक की मदद ली, जिस पर सवार होकर आरोपी भागे थे। जैसे ही मानव रहित विमान (ड्रोन) के माध्यम से किसी अनजान जगह पर छिपाए गए दुपहिया वाहन का पता चला, पुलिस को आरोपियों के ठिकाने मिल गए।
मध्य प्रदेश के गढ़ में घुसकर सरगनाओं को दबोचा!
अपराध करने के बाद आरोपी मध्य प्रदेश भाग गए थे और सोच रहे थे कि वे वहां सुरक्षित हैं। लेकिन राज्य निगरानी प्रकोष्ठ के दलों ने मध्य प्रदेश पुलिस की मदद से स्थानीय स्तर पर घात लगाकर उन तीन आदतन अपराधियों को दबोच लिया। जब गुजरात पुलिस के दल ने आरोपियों को पकड़ा, तो उनके सिर झुके हुए थे और उन्हें सड़क पर ही कानून की गिरफ्त में ले लिया गया। आरोपियों से लूटी गई कितनी रकम बरामद हुई है, यह पता लगाने के लिए अभी गहन पूछताछ और कानूनी कार्रवाई चल रही है।
‘महानगर मेट्रो’ का अहम सवाल: आखिर स्थानीय पुलिस क्यों नाकाम रही?
जब भी गुजरात में कोई बड़ा अपराध होता है, तो गांधीनगर का राज्य निगरानी प्रकोष्ठ या स्थानीय अपराध शाखा आकर मामले को सुलझाता है; ऐसे में स्थानीय सुरक्षा कैमरा तंत्र और पुलिस खुफिया तंत्र क्या करते हैं? राजकोट जैसे व्यस्त शहर से 2.49 करोड़ रुपये लूटकर आरोपियों के मध्य प्रदेश भागने तक स्थानीय तंत्र गहरी नींद में क्यों सोया रहा?
हालांकि, जिस तरह निर्लिप्त राय और उनके दल ने अत्याधुनिक तकनीक और मानवीय खुफिया जानकारी का उपयोग करके मात्र 10 दिनों में एक अंतर-राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, उसने निश्चित रूप से गुजरात पुलिस का मान बढ़ाया है और अपराधियों में खलबली मचा दी है। ‘महानगर मेट्रो समाचार’ इस मामले से जुड़ी सभी कानूनी जानकारियां अपने अगले अंक में लाता रहेगा। बने रहिए हमारे साथ!

