नई दिल्ली (पॉलिटिकल डेस्क): गाजा पट्टी में इज़राइल और हमास के बीच चल रही भीषण लड़ाई और हिंसा की आग अब भारत के राजनीतिक गलियारों में भी तेज हो गई है। कांग्रेस की सीनियर नेता और संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने गाजा में हो रहे ‘नरसंहार’ और लगातार हो रहे अमानवीय हमलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर सबसे बड़ा और सबसे घातक राजनीतिक हमला किया है। सोनिया गांधी ने साफ तौर पर आरोप लगाया है कि भारत सरकार ने अपनी पारंपरिक संतुलित नीति को छोड़कर इज़राइल समर्थक रुख अपना लिया है, जो चिंताजनक है।
फ़िलिस्तीन के मासूम बच्चों पर हो रही क्रूरता के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं
सोनिया गांधी ने ग्लोबल स्टेज पर भारत के रुख पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि मोदी सरकार को गाजा और फ़िलिस्तीन में लाखों मासूम नागरिकों, खासकर मासूम बच्चों पर हो रही अमानवीय क्रूरता और हिंसा का कड़ा विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा से पीड़ितों और न्याय के साथ खड़ा रहने वाला देश रहा है, लेकिन मौजूदा सरकार ग्लोबल दबाव या अपने खास राजनीतिक हिसाब-किताब की वजह से इस भयानक मानवीय संकट पर चुप रही है। गाजा में हजारों बेगुनाहों की मौत और अस्पतालों और स्कूलों पर बमबारी सिर्फ युद्ध नहीं बल्कि नरसंहार है, जिसके खिलाफ भारत को आवाज उठानी चाहिए।
भारत को उसके इतिहास और पारंपरिक विदेश नीति की याद दिलाई
अपने बयान में, कांग्रेस नेता ने भारत की ऐतिहासिक विदेश नीति का जिक्र करके मौजूदा शासकों को खरी-खोटी सुनाने की कोशिश की है। उन्होंने याद दिलाया कि महात्मा गांधी से लेकर पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी तक सभी भारतीय नेताओं ने हमेशा फिलिस्तीन की संप्रभुता और उसके नागरिकों के मानवाधिकारों का समर्थन किया था। लेकिन, मोदी सरकार ने इजरायल की तरफ बहुत ज्यादा झुककर भारत की दशकों पुरानी उस भरोसेमंद और स्वतंत्र छवि को नुकसान पहुंचाया है।
राजनीतिक गरमागरमी: विपक्ष ने सरकार को दुनिया भर में घेरा
सोनिया गांधी के इन कड़े आरोपों के बाद देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी गठबंधन भी इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ हाथ मिला रहा है और मांग कर रहा है कि भारत इंटरनेशनल लेवल पर न्यूट्रल रहे और तुरंत सीज़फ़ायर के लिए दबाव डाले। दूसरी तरफ़, सत्ताधारी पार्टी BJP इन आलोचनाओं का जवाब यह कहकर दे रही है कि भारत की पॉलिसी हमेशा आतंकवाद का विरोध करने और देश के हितों को सबसे ऊपर रखने की रही है। लेकिन सोनिया गांधी के कड़े रुख़ ने यह साफ़ कर दिया है कि आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक, सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष गाज़ा संकट और भारत सरकार की विदेश नीति पर आमने-सामने की टक्कर के मूड में हैं।

