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‘मजदूरी कर पढ़ाया, कोचिंग के लिए गिरवी रखी जमीन’, दो मिनट की देरी से टूटा NEET का सपना तो रागिनी के घर ऐसा है माहौल

दो मिनट की देरी की वजह से रागिनी विश्वकर्मा के सपने टूट गए हैं। रागिनी के पिता ने मजदूरी करके उसे पढ़ाया था। मगर एक छोटी चूक की वजह से पिता का कलेजा फट रहा है।

विदिशा: दो मिनट की देरी सालों की मेहनत और कुर्बानी पर पानी फेर दिया है। विदिशा की रागिनी विश्वकर्मा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ है, जिसके डॉक्टर बनने का सपना टूट गया है। पिता मजदूरी कर परिवार को पालते हैं। बिटिया रागिनी घर पर ही रहकर नीट की तैयारी करती है। पिता का सपना है कि बिटिया डॉक्टर बन जाए। इसके लिए उन्होंने प्राइवेट फायनेंस कंपनी से लोन भी लिए हैं।

दो मिनट की देरी से छूट गई परीक्षा

दरअसल, विदिशा शहर से 70 किमी दूर कुल्हान गांव हैं। इसी गांव में रागिनी विश्वकर्मा रहती है। विदिशा स्थित गर्ल्स कॉलेज में रागिनी का सेंटर था। पिता के साथ बाइक से वह परीक्षा केंद्र के लिए निकली थी। रास्ते में बारिश होने की वजह से रास्ते में रुकना पड़ा। इसकी वजह से दो मिनट की देरी हो गई। देर होने पर रागिनी को अंदर नहीं जाने दिया गया। मिन्नतों के बाद एंट्री मिली लेकिन बायोमेट्रिक सिस्टम बंद हो गया।

टूट गया सपना

दो मिनट की देरी की वजह रागिनी की वर्षों की मेहनत पर पानी फिर गया है। अब उसे नीट की परीक्षा देने के लिए साल भर और इंतजार करना पड़ेगा। इसके बाद आगे मौका मिलेगा। पहली बार की परीक्षा में रागिनी शामिल हुई थी। पेपर अच्छा गया था, उसे उम्मीद थी कि नीट निकल जाएगा। लेकिन पेपर लीक की वजह से पहले सपनों पर पलीता लगा और अब देरी उसे एक साल दूर कर दिया है।

पिता करते हैं मजदूरी

रागिनी के पिता मजदूरी कर परिवार का पेट पालते हैं। रागिनी समेत आठ लोगों का परिवार पिता की कमाई पर ही निर्भर है। बेटी की परीक्षा छूटना उनके लिए सदमे से कम नहीं है। साथ ही पढ़ाई के लिए उन्होंने हजारों रुपए कर्ज लिए हैं।

हमारे पिता की स्थिति की अच्छी नहीं है। पिता ने मजदूरी करके हमें पढ़ाया है। लोग वीडियो डाल रहे हैं लेकिन किसी ने कुछ हमसे पूछा नहीं है।
रागिनी विश्वकर्मा, नीट छात्रा

जमीन भी रख दी है गिरवी

वहीं, रागिनी के पिता ने बेटी का सपना पूरा करने के लिए अपनी जमीन गिरवी रख दी है। साथ ही प्राइवेट फायनेंस कंपनी से उन्होंने लोन लिए हैं, ताकि बेटी की पढ़ाई बाधित नहीं हो। बेटी की पढ़ाई के लिए एक स्कूटी भी खरीदी थी। आंखों में हजारों सपने थे कि बेटी डॉक्टर बन जाएगी तो तकलीफें दूर हो जाएंगी। लेकिन बदकिस्मती से यह इंतजार लंबा हो गया है।

कर्ज मांगने वाले आ रहे हैं घर

रागिनी के पड़ोसियों का कहना है कि परिवार पर कर्ज है। कर्ज मांगने वाले लोग लगातार घर आते हैं। कोई सुध लेने वाला नहीं है। अब सरकार को चाहिए कि बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाए। गरीब आदमी कहां से खर्च वहन करेगा।

आंखों के सामने गेट कर दिया बंद

वहीं, रागिनी विश्वकर्मा ने कहा कि मेरी आंखों के सामने उन्होंनने गेट बंद कर दिया। मेरे पिता ने हमें मेहनत करके तैयारी करवाई। हमारे परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि हम फिर से तैयारी कर सकें। हमने शुरू से ही सरकारी स्कूल में पढ़ाई की है।

सदमे में परिवार

दो मिनट की देरी से रागिनी के परिवार को ऐसा जख्म मिला है, जिससे उबरने में सालों लग सकते हैं। घर पर हौसला देने वाले लोगों का जमावड़ा है। कुरवाई एसडीएम ने भी रागिनी को बुलाकर उसका हौसला बढ़ाया है। अगले साल की तैयारी करो। लेकिन परिवार को हौसलों से ज्यादा आर्थिक मदद की जरूरत है। पिता के पास मजदूरी के अलावे के कुछ बचा नहीं है, जिससे बेटी की पढ़ाई आगे करवा सकें।

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