महानगर मेट्रो एक्सक्लूसिव: बड़े मगरमच्छों के सामने एसडीएम भी लाचार! पिंगलवाड़ा में 100 से ज्यादा डंपरों से कुदरत का चीरहरण, विधायक अक्षय पटेल और गोकुल भरवाड़ की जुगलबंदी से सरकारी खजाने को अरबों का चूना!
वडोदरा/करजन : गुजरात के वडोदरा जिला अंतर्गत आने वाले करजन तालुका से भ्रष्टाचार और अवैध बालू-मिट्टी खनन का एक ऐसा खौफनाक सच सामने आया है, जिसने गांधीनगर के वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठे आला अफसरों और राजनेताओं के पैरों तले की जमीन खिसका दी है। करजन के पिंगलवाड़ा गांव में ससरोड वाडा रोड से नाकेश्वर रोड की तरफ जाने वाले पूरे इलाके में प्राकृतिक संपदा की सरेआम डकैती डाली जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस काले कारोबार के तार सीधे स्थानीय विधायक और तालुका पंचायत सदस्य से जुड़े होने के गंभीर आरोप लगे हैं।
100 से ज्यादा डंपर और पोकलेन मशीनें: पूरे करजन को खोद डाला!
स्थानीय सूत्रों से मिली सुलगती खबरों के मुताबिक, पूरे करजन तालुका में इस वक्त 100 से ज्यादा डंपर, 15 से अधिक हिताची (पोकलेन) और लोडर मशीनें दिन-रात बिना थमे अवैध खनन के काम में जुटी हुई हैं। हर दिन लाखों रुपये की रॉयल्टी चोरी कर सरकार की तिजोरी को हर महीने करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।
इस पूरे गोरखधंधे के पीछे करजन के विधायक अक्षय पटेल और करजन तालुका पंचायत सदस्य गोकुल भरवाड़ उर्फ घूघा का नाम सबसे ऊपर आ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि:
विधायक अक्षय पटेल ने सत्ता के रसूख पर अरबों रुपये की बेनामी संपत्तियां और काला धन इकट्ठा कर लिया है।
गोकुल भरवाड़ पैसे के दम पर पूरे प्रशासनिक तंत्र को खरीदकर इस अवैध बालू चोरी का मुख्य मास्टरमाइंड बना बैठा है।
अफसर एसी केबिनों में मस्त, माफिया नदी और जमीनें खोदने में व्यस्त!
इस अवैध धंधे के खिलाफ गांव के लोगों ने एक बार नहीं बल्कि दर्जनों बार लिखित और मौखिक शिकायतें सबूतों के साथ इन ‘महारथियों’ को सौंपी हैं:
- गांधीनगर खान एवं खनिज विभाग (फ्लाइंग स्क्वाड) के अधिकारी चावड़ा
- वडोदरा खान एवं खनिज विभाग की स्थानीय टीम
- करजन के तहसीलदार (मामलतदार) सी. आर. पढियार
- एसडीएम (SDM) शिवम बारिया
कागजी कार्रवाई का खेल:
इतनी शिकायतों के बाद भी आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अंदरखाने की खबर यह है कि गांधीनगर से लेकर स्थानीय प्रशासन तक हर महीने ‘मोटे हफ्ता’ की रकम पहुंचती है, जिसके कारण अधिकारियों ने अपनी आंखों पर ‘गांधी छाप’ नोटों की पट्टी बांध ली है।
रिवॉल्वर से लेकर पुलिस के अपहरण तक का खूनी इतिहास!
इस महाघोटाले का मुख्य चेहरा गोकुल भरवाड़ उर्फ घूघा कोई साधारण अपराधी नहीं है, उसका इतिहास संगीन जुर्मों की काली स्याही से लिखा गया है:
पूर्व में उसे अवैध रिवॉल्वर के साथ रंगे हाथों गिरफ्तार किया जा चुका है।
करजन थाने के ही एक ईमानदार पुलिस कांस्टेबल लक्ष्मण अहीर का अपहरण कर उन्हें जान से मारने की कोशिश का गंभीर मामला भी उस पर दर्ज है।
बावजूद इसके, राजनीतिक वरदहस्त और बेहिसाब पैसे के दम पर वह हर बार कानून के शिकंजे से बच निकलता है और दोबारा नदियों की छाती चीरने निकल पड़ता है।
एसडीएम (SDM) की लाचारी या सत्ता के आगे आत्मसमर्पण?
जब इस पूरे मामले को लेकर करजन के एसडीएम शिवम बारिया से आमने-सामने तीखे सवाल किए गए, तो उनका जवाब प्रशासनिक व्यवस्था की लाचारी को उजागर करने वाला था। एसडीएम ने कहा:
अवैध रेत और मिट्टी खनन को रोकना मेरे हाथ में नहीं है, यह काम खान एवं खनिज विभाग का है।
हैरानी की बात है कि रसूखदारों के आगे साहब अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियां ही भूल गए और पूरा ठीकरा दूसरे विभाग पर फोड़ दिया। हालांकि, बातचीत में एसडीएम ने यह जरूर स्वीकार किया कि:
“हम बार-बार छापेमारी करते हैं और पेनाल्टी भी वसूलते हैं, लेकिन जांच में पता चला कि वे सब तो सिर्फ छोटी मछलियां थीं! असली और बड़ा भ्रष्टाचार तो गोकुल भरवाड़ उर्फ घूघा करता है। ऐसे बड़े मगरमच्छों पर हाथ डालना एसडीएम के बस की बात नहीं है!”
‘वॉशिंग मशीन’ की राजनीति और जनता का फूटा गुस्सा
इलाके में इस बात की जबरदस्त चर्चा है कि कांग्रेस छोड़कर भारी भरकम सौदेबाजी के साथ बीजेपी में आए करजन विधानसभा के विधायक अक्षय पटेल मानो ‘वॉशिंग मशीन’ में धुलकर पूरी तरह पवित्र हो चुके हैं! लेकिन अब पिंगलवाड़ा और उसके आस-पास के गांवों के नागरिकों का सब्र का बांध टूट चुका है।
स्थानीय निवासी अब पुरजोर मांग कर रहे हैं कि अरबों रुपये के इस घोटाले के पीछे शामिल विधायक अक्षय पटेल और गोकुल भरवाड़ के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा निष्पक्ष जांच बिठाई जाए और इनकी आय से अधिक संपत्तियों को कुर्क किया जाए। जनता का साफ कहना है कि ऐसे दल-बदलू और भ्रष्ट नेताओं को अब करजन की जनता बाहर का रास्ता दिखाएगी।
‘महानगर मेट्रो’ का सीधा सवाल!
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सूबे के मुख्यमंत्री इन बेखौफ खनन माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ा कानूनी ‘बुल्डोजर’ चलाएंगे? या फिर सत्ताधारी दल के बड़े चेहरे होने के नाते इस मामले को भी ठंडे बस्ते में दबा दिया जाएगा?
सरकार भले ही इस पर चुप्पी साधे रहे, लेकिन ‘महानगर मेट्रो न्यूज’ जनता की आवाज बनकर इस गंभीर मुद्दे को छोड़ने वाला नहीं है। इस मामले की गूंज गांधीनगर सचिवालय तक पहुंचाई जाएगी और जब तक इस क्षेत्र की प्राकृतिक नदियों को इन सफेदपोश राक्षसों से मुक्ति नहीं मिल जाती, हमारी यह खोजी लड़ाई जारी रहेगी!
विशेष खोजी रिपोर्ट: महानगर मेट्रो न्यूज ब्यूरो।

