Homeभारतगुजरातअंबाजी मंदिर में 'भूतिया कावड़ियों' का राज

अंबाजी मंदिर में ‘भूतिया कावड़ियों’ का राज

3000 की सैलरी, करोड़ों की संपत्ति और सवालों के घेरे में व्यवस्था!

अंबाजी। जहां योगी सरकार ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित गड़बड़ियों के मामले में ‘SIT’ चलाकर मंदिर अधिकारियों की नींव हिला दी है, वहीं गुजरात के पवित्र स्थल अंबाजी मंदिर से भी एडमिनिस्ट्रेटिव गड़बड़ियों और करोड़ों की मायावी दौलत का ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जो कावड़िए कभी सिर्फ 3,000 रुपये महीने की सैलरी पर पानी भरते थे, वे अब करोड़ों के मालिक बने बैठे हैं और एडमिनिस्ट्रेशन ने इन ‘भूतिया कावड़ियों’ के खिलाफ रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। परंपरा के अनुसार, सिद्धपुर के ठाकर परिवार (जिन्हें भट्टजी महाराज के नाम से जाना जाता है) अंबाजी मंदिर में पूजा करवाते हैं। इन भट्टजी महाराज ने माताजी के सुबह के अभिषेक के लिए 6 km दूर सरस्वती कुंड से पवित्र जल लाने के लिए अपने खर्चे पर कावड़ियों को रखा है।

लेकिन, असली खेल आरती के बाद शुरू होता है। भट्टजी महाराज दो बार की आरती पूरी करने के बाद, माताजी के सबसे पवित्र निजी मंदिर को इन कावड़ियों के भरोसे छोड़कर अपने बनाए गद्दे पर जाकर आराम से बैठ जाते हैं! दूसरी तरफ, ये कावड़िए पूरे दिन मुख्य मंदिर परिसर में बैठकर भक्तों को आशीर्वाद बांटते रहते हैं, जैसे वे खुद सरकारी पुजारी न हों! सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल यह है कि ये कावड़िए किसके आदमी हैं?

वे अंबाजी मंदिर ट्रस्ट के सरकारी कर्मचारी नहीं हैं। उन्हें किसी आउटसोर्सिंग या कॉन्ट्रैक्ट एजेंसी ने भी काम पर नहीं रखा है। जो लोग एडमिनिस्ट्रेटिव किताबों में ‘भूत’ हैं, यानी जिनका कोई वजूद ही नहीं है, वे किस हक से देश के सबसे बड़े शक्तिपीठ के गर्भगृह पर राज कर रहे हैं? यह सारा खेल मंदिर के बड़े अधिकारियों की नज़रों के नीचे चल रहा है, फिर भी किस अजीब स्वार्थ या दबाव में इन कावड़ियों पर ‘दया भरी नज़र’ रखी जा रही है, यह जांच का विषय है। अगर कल को अयोध्या की तरह अंबाजी मंदिर में भी कोई बड़ी फाइनेंशियल गड़बड़ी या सोने, चांदी और ज्वेलरी का गबन सामने आता है, तो मंदिर वहिवटदार कानूनी तौर पर किसकी गर्दन दबाएगा? ऐसे आदमी पर एक्शन कैसे लेगा जो संस्था के रिकॉर्ड में ही नहीं है?

अब लोकल भक्तों में बहुत गुस्सा है और मांग उठ रही है कि अंबाजी मंदिर में कावड़ियों को कानूनी और ऑफिशियली नियुक्त किया जाए। साथ ही, अगर अयोध्या की तरह हाई लेवल जांच कराई जाए कि तीन हजार रुपये कमाने वाले ये कांवड़िए करोड़ों की प्रॉपर्टी के मालिक कैसे बन गए, तो करोड़ों का घोटाला सामने आने की संभावना है।

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