मध्य प्रदेश की सियासत में कांग्रेस के साथ वो खेल हो गया जिसकी उम्मीद खुद उसने सपने में भी नहीं की थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इस महा-ब्लंडर की भविष्यवाणी कांग्रेस के ही दिग्गज नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने बहुत पहले कर दी थी।
कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी का वो ट्वीट जिसने हिला दी एमपी की सियासत
भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस अपने विधायकों को रिसॉर्ट पॉलिटिक्स के जरिए सहेजने और क्रॉस वोटिंग से बचाने के ताने-बाने बुन रही थी, ठीक उसी वक्त पार्टी के भीतर से एक ऐसी आवाज उठी, जिसे आलाकमान ने पूरी तरह अनसुना कर दिया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता नरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया से लेकर दिल्ली दरबार तक सीधे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को टैग करते हुए साफ शब्दों में आगाह किया था कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवार चुनने में बहुत बड़ी चूक की जा रही है। आज जब बिना वोटिंग के बीजेपी ने तीसरी सीट अपनी झोली में डाल ली, तो ज्ञानचंदानी की वही बातें कांग्रेस को सबसे ज्यादा चुभ रही हैं।
पूरे मामले की 6 बड़ी बातें
नरेश ज्ञानचंदानी ने नामांकन से पहले ही राहुल और प्रियंका गांधी को मैसेज भेजकर बड़ी चूक के प्रति सचेत किया था।
ज्ञानचंदानी का साफ दावा था कि मध्य प्रदेश से दिग्विजय सिंह को दोबारा रिपीट करना ही एकमात्र सबसे सुरक्षित विकल्प था।
दिग्विजय सिंह के मैदान में रहने से न तो फॉर्म में तकनीकी लापरवाही होती और न ही क्रॉस वोटिंग का कोई खतरा रहता।
आलाकमान ने ज्ञानचंदानी की चेतावनी को नजरअंदाज कर मीनाक्षी नटराजन पर दांव खेला।
नटराजन के नामांकन फॉर्म में रह गई एक मामूली तकनीकी लापरवाही को बीजेपी के रणनीतिकारों ने हथियार बना लिया।
संख्या बल न होने के बावजूद बीजेपी ने बिना वोटिंग के कांग्रेस के हाथ से यह तीसरी सीट छीन ली।
दिग्विजय सिंह को न लाने का खामियाजा भुगता
नरेश ज्ञानचंदानी का यह तर्क अब राजनीतिक गलियारों में सच की तरह गूंज रहा है कि अगर पार्टी दिग्विजय सिंह के नाम पर मुहर लगाती, तो उनका जमीनी मैनेजमेंट और कानूनी समझ ऐसी किसी भी तकनीकी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ती। वरिष्ठ पत्रकार प्रभु पटेरिया समेत तमाम विश्लेषक भी अब ज्ञानचंदानी के सुर में सुर मिला रहे हैं। दिग्गजों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व विधायकों की गिनती में इतना उलझ गया कि फॉर्म की बुनियादी जांच जैसी जरूरी चीज ही भूल गया। अमित शाह की एडवांस प्लानिंग ने कांग्रेस की इसी संगठनात्मक ढिलाई को पकड़ लिया और पूरा पासा ही पलट दिया।
क्रेडिबिलिटी पर उठ रहे सवाल
इस करारी हार ने मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर एक नए गृहयुद्ध का रास्ता साफ कर दिया है। ज्ञानचंदानी की चेतावनी का सच होना यह साबित करता है कि जमीन से जुड़े नेताओं के फीडबैक को नजरअंदाज करना आलाकमान को कितना भारी पड़ सकता है। जहां बीजेपी हर एक सीट के लिए माइक्रो-लेवल पर जाकर व्यूहरचना कर रही थी, वहीं कांग्रेस अपने उम्मीदवार के कागजात तक दुरुस्त नहीं रख पाई। अब इस हार के बाद एमपी से लेकर दिल्ली तक जिम्मेदारी तय करने और आपसी सिरफुटव्वल का दौर शुरू होना तय है।

