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जावरा में जानलेवा बनीं जर्जर सड़कें और खुले गड्ढे, मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भेजा विस्तृत ज्ञापन

बारिश में बड़े हादसों की आशंका, संगठन ने उठाई तत्काल गुणवत्तापूर्ण भराव और अनावश्यक खुदाई पर रोक लगाने की मांग।

रतलाम/जावरा। जावरा नगर में लंबे समय से क्षतिग्रस्त मुख्य मार्गों, बाजारों और गली-मोहल्लों की सड़कों को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश है। आगामी वर्षा ऋतु में संभावित दुर्घटनाओं, जलभराव और खुले गड्ढों से उत्पन्न होने वाले खतरों को देखते हुए ‘भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट’ ने सीधे शासन स्तर पर मोर्चा खोला है। ट्रस्ट द्वारा मध्यप्रदेश शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री माननीय श्री कैलाश विजयवर्गीय को जनहित में एक विस्तृत ज्ञापन प्रेषित कर तुरंत दंडात्मक व सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।

विकास के नाम पर सड़कों को किया छलनी

संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह यादव, रतलाम जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह जेतका एवं नगर अध्यक्ष शेखर नाहर द्वारा भेजे गए ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि जावरा नगर की सड़कें लंबे समय से बदहाली का आंसू रो रही हैं। पेयजल पाइपलाइन, गैस पाइपलाइन, दूरसंचार और अन्य निर्माण कार्यों के लिए नगर पालिका व संबंधित विभागों ने विभिन्न स्थानों पर सड़कों को खोदा तो सही, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद उन्हें उनके हाल पर ही छोड़ दिया गया।
अधूरा भराव और लापरवाही पड़ सकती है भारी

ज्ञापन में साफ तौर पर नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया गया है। पदाधिकारियों ने बताया कि कई स्थानों पर गड्ढों को पूरी तरह खुला छोड़ दिया गया है, तो कहीं-कहीं केवल औपचारिकता निभाते हुए ‘टेम्प्रेरी’ (अधूरा) भराव किया गया है। इसके कारण सड़कों पर हर तरफ मिट्टी, गिट्टी और नुकीले पत्थर फैले हुए हैं। वर्षा काल में यह लापरवाही किसी बड़े हादसे, वाहनों के फिसलने, आम जन के घायल होने और यातायात बाधित होने का गंभीर कारण बन सकती है। विशेषकर रात्रि के समय, जलभराव की स्थिति में ये खुले गड्ढे राहगीरों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का कुआं) साबित हो सकते हैं।
संगठन ने रखीं चार प्रमुख मांगें:

मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने जनहित और नागरिक सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए मंत्री विजयवर्गीय से निम्नलिखित बिंदुओं पर तुरंत आदेश जारी करने का आग्रह किया है:

गुणवत्तापूर्ण भराव: नगर के सभी छोटे-बड़े खुले गड्ढों का तत्काल और मजबूत तकनीकी मापदंडों के साथ भराव कराया जाए।
मटेरियल की सफाई: सड़कों और मोड़ों पर बिखरी पड़ी निर्माण सामग्री (गिट्टी-पत्थर) को तुरंत हटाया जाए ताकि वाहन न फिसलें।
खुदाई पर रोक: मानसून और वर्षा ऋतु के दौरान शहर में अनावश्यक सड़क खुदाई व अन्य निर्माण कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए।
संयुक्त मॉनीटरिंग: नगर पालिका, लोक निर्माण विभाग और संबंधित कंपनियों की एक संयुक्त टीम गठित हो, जो नियमित रूप से सड़कों की मॉनीटरिंग कर सुरक्षा सुनिश्चित करे।
प्रशासन से अपेक्षा की गई है कि आम नागरिकों के जीवन की रक्षा के लिए इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए आवश्यक और ठोस कार्रवाई शीघ्र अति शीघ्र अमल में लाई जाए।

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