Homeभारतगुजरातमहानगर मेट्रो महाविस्फोट : खाकी वर्दी में छिपा काला चेहरा!

महानगर मेट्रो महाविस्फोट : खाकी वर्दी में छिपा काला चेहरा!

गुजरात यूनिवर्सिटी पुलिस स्टेशन का विवादित पुलिसकर्मी ‘गिरी’ निजी ऑफिस से चला रहा बूटलेगरों का नेटवर्क!

अहमदाबाद। अहमदाबाद पुलिस महकमे की साख पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शहर में कथित “वहीवटदार” के रूप में चर्चित ‘गिरी’ कोई निजी व्यक्ति नहीं, बल्कि पुलिस विभाग का ही कर्मचारी बताया जा रहा है। आरोप है कि यह पुलिसकर्मी सरकारी ड्यूटी छोड़ वाडज पुलिस चौकी के पास स्थित एक निजी ऑफिस से पूरे शहर के बूटलेगरों और अवैध धंधेबाजों का लाखों रुपए का नेटवर्क संचालित कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, उक्त कर्मचारी पुलिस स्टेशन में बैठने के बजाय एक गुप्त प्राइवेट ऑफिस में डेरा जमाकर रोजाना शराब माफियाओं और अपराधियों के साथ आर्थिक लेन-देन करता है। इस पूरे मामले ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।

गुलबाई टेकरा बना अपराध का अड्डा?

जानकारी के अनुसार, गुलबाई टेकरा क्षेत्र में अवैध गतिविधियां खुलेआम फल-फूल रही हैं। आरोप है कि पुलिस संरक्षण में यहां केमिकलयुक्त जहरीली देसी शराब बेची जा रही है, जिससे भविष्य में किसी बड़े लठ्ठाकांड की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा विदेशी शराब के कंटेनरों की कटिंग, अवैध सप्लाई और स्पा सेंटरों की आड़ में देह व्यापार जैसे संगठित अपराध भी धड़ल्ले से संचालित होने की चर्चा है।

स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल

स्थानीय लोगों में चर्चा है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों का ध्यान आम जनता की सुरक्षा से ज्यादा कथित “हफ्तावसूली” पर केंद्रित है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतने बड़े स्तर पर अवैध कारोबार बिना पुलिस संरक्षण के कैसे चल सकता है?

PCB, क्राइम ब्रांच और DCP स्क्वॉड क्यों खामोश?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्य की बड़ी जांच एजेंसियां — पीसीबी, क्राइम ब्रांच और डीसीपी स्क्वॉड — अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाई हैं? सूत्रों का दावा है कि इस नेटवर्क को विभाग के कुछ बड़े अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते कार्रवाई से बचाया जा रहा है।

करोड़ों की संपत्ति ने बढ़ाए सवाल

बताया जा रहा है कि वर्षों से विवादों में रहे इस पुलिसकर्मी के पास करोड़ों की संपत्ति, आलीशान बंगले, लग्जरी गाड़ियां और बेशकीमती जमीनें मौजूद हैं। सवाल यह उठता है कि सरकारी वेतन पाने वाला कर्मचारी इतनी बड़ी संपत्ति का मालिक कैसे बन गया?

गृह विभाग से कार्रवाई की मांग

अब नजरें राज्य के गृह विभाग और उपमुख्यमंत्री पर टिकी हैं। जनता जानना चाहती है कि क्या खाकी की आड़ में चल रहे इस कथित अवैध नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर पूरा मामला दबा दिया जाएगा? यदि भविष्य में जहरीली शराब से कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

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