तक्षशिला क्रेस्ट आवासीय इमारत की दुकान पर निजी वित्त कंपनी का था कर्ज, आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र बनाकर व्यापारी को बेची संपत्ति; दुकान सील होने पर सामने आया मामला
अहमदाबाद। शहर के पूर्वी क्षेत्र मणिनगर में अचल संपत्ति के कारोबार से जुड़ी 1.10 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मणिनगर स्थित तक्षशिला क्रेस्ट नामक आवासीय इमारत के भूतल पर बनी एक दुकान को लेकर बिल्डर भाइयों पर व्यापारी के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। शिकायत के अनुसार, दुकान पर निजी वित्त कंपनी का कर्ज होने के बावजूद बिल्डरों ने यह बात छिपाकर व्यापारी को दुकान बेच दी। आरोप है कि सौदे को पूरा करने के लिए निजी वित्त कंपनी का फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र भी तैयार किया गया। मामले में मणिनगर पुलिस ने बिल्डर भाइयों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित व्यापारी ने तक्षशिला क्रेस्ट इमारत के भूतल पर स्थित दुकान खरीदने के लिए बिल्डर भाइयों से सौदा किया था। आरोप है कि बिल्डरों ने व्यापारी को भरोसा दिलाया कि दुकान पूरी तरह कर्जमुक्त है और उस पर किसी प्रकार का कानूनी या आर्थिक विवाद नहीं है। इसके बाद व्यापारी से अलग-अलग चरणों में कुल 1.10 करोड़ रुपये ले लिए गए। व्यापारी को किसी तरह का संदेह न हो, इसके लिए कथित तौर पर निजी वित्त कंपनी का फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र तैयार किया गया। इसी प्रमाण पत्र के आधार पर दुकान का पंजीकृत विक्रय दस्तावेज भी बनवा दिया गया।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब बिल्डर पूरी आवासीय इमारत और संपत्ति पर ली गई परियोजना ऋण की किस्तें चुकाने में असफल रहे। इसके बाद निजी वित्त कंपनी ने कानूनी कार्रवाई करते हुए भूतल पर स्थित संबंधित दुकान को सील कर दिया। अपनी रकम देकर खरीदी गई दुकान पर अचानक ताला और सील देखकर व्यापारी हैरान रह गया। इसके बाद उसने निजी वित्त कंपनी और पंजीयक कार्यालय में दस्तावेजों की जानकारी जुटाई। जांच में कथित तौर पर सामने आया कि बिल्डर की ओर से दिया गया अनापत्ति प्रमाण पत्र फर्जी था और दुकान पर पहले से ही वित्तीय बोझ मौजूद था।
खुद के साथ 1.10 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी होने की जानकारी मिलने पर व्यापारी ने मणिनगर पुलिस थाने में लिखित शिकायत दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर बिल्डर भाइयों के खिलाफ कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार करने, विश्वासघात और धोखाधड़ी सहित अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने कथित फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों को जांच के लिए अपने कब्जे में लिया है। दस्तावेजों की वास्तविकता की पड़ताल के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला और बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों की सहायता लेने की बात भी सामने आई है। आरोपियों की तलाश में पुलिस की अलग-अलग टीमें जांच कर रही हैं।
इस घटना के बाद क्षेत्र के संपत्ति कारोबार में भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस ने व्यापारियों और आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी दुकान या बड़ी संपत्ति को खरीदने से पहले उसके स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों, बैंक या वित्त कंपनी के कर्ज और अनापत्ति प्रमाण पत्र की संबंधित संस्थाओं से पूरी तरह पुष्टि कर लें।

