कचरा प्रसंस्करण मशीनें बंद होने का दावा, जबकि कबाड़ से भरे टेंपो के बेरोकटोक अंदर जाने पर सवाल; पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग
आणंद। करमसद-आणंद महानगरपालिका क्षेत्र की डंपिंग साइट पर कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आणंद सेवासदन की सीमा में स्थित इस डंपिंग साइट पर आम नागरिकों और मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर रोक होने की बात कही जा रही है। वहीं, आरोप है कि कबाड़ से भरे टेंपो और अन्य वाहनों को बिना किसी रोकटोक के अंदर जाने दिया जा रहा है। इस स्थिति ने डंपिंग साइट के संचालन और वहां की व्यवस्था को लेकर संदेह पैदा कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, जब डंपिंग साइट पर जाकर वहां की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास किया गया तो मुख्य द्वार पर तैनात कर्मचारियों ने अनुमति का हवाला देते हुए अंदर जाने से रोक दिया। कर्मचारियों की ओर से सुरक्षा और नियमों का हवाला दिया गया। हालांकि, इस दौरान यह सवाल उठाया गया कि यदि आम नागरिकों और मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर प्रतिबंध है तो कबाड़ से भरे टेंपो और अन्य वाहनों को अंदर जाने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है? क्या इन वाहनों के प्रवेश के लिए कोई विशेष व्यवस्था है और इसकी निगरानी कौन करता है?
डंपिंग साइट पर लगे कचरा प्रसंस्करण संयंत्रों को लेकर भी सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि वहां स्थापित मशीनें बंद पड़ी हैं और उनका नियमित संचालन नहीं हो रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि प्रसंस्करण मशीनें बंद हैं तो प्रतिदिन आने वाले कचरे का निपटारा किस तरह किया जा रहा है। कचरे के निपटारे से जुड़े सरकारी रिकॉर्ड, मशीनों के संचालन और खर्च किए जा रहे सरकारी धन की भी जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
इस पूरे मामले में यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि डंपिंग साइट पर प्रवेश को लेकर बनाए गए नियम सभी पर समान रूप से लागू किए जा रहे हैं या नहीं। यदि आम लोगों और मीडिया के लिए प्रवेश प्रतिबंधित है तो वहां आने-जाने वाले वाहनों की जांच और उनके प्रवेश का रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए। हालांकि, भ्रष्टाचार, मिलीभगत या आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रशासन, जिला कलेक्टर और उच्च अधिकारियों से डंपिंग साइट की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है। मांग की जा रही है कि प्रसंस्करण मशीनों की स्थिति, कचरे के निपटारे का रिकॉर्ड, वाहनों की आवाजाही और सरकारी धन के उपयोग की जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा अनियमितता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

