शेहेरा, छोटा उदेपुर और संतरामपुर से लकड़ी से भरे ट्रक पहुंचने की चर्चा; वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
, नडियाद। गुजरात में एक ओर वन संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के लिए वृक्षारोपण अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अवैध रूप से पेड़ों की कटाई और लकड़ी के कारोबार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। नडियाद के संतराम वेब्रिज के पास कथित रूप से बड़े पैमाने पर अवैध लकड़ी का कारोबार संचालित होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यहां रात के अंधेरे और सुबह के समय लकड़ी से भरे ट्रक पहुंचते हैं, जिसके बाद लकड़ी की नीलामी की जाती है। इस पूरे मामले ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंचमहल और मध्य गुजरात के विभिन्न वन क्षेत्रों में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई किए जाने के आरोप हैं। इनमें शेहेरा, छोटा उदेपुर और संतरामपुर जैसे क्षेत्र शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन इलाकों से लकड़ी भरकर ट्रकों के माध्यम से नडियाद तक पहुंचाई जाती है। इसके बाद संतराम वेब्रिज के आसपास कथित तौर पर लकड़ी की बिक्री और नीलामी की प्रक्रिया होती है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और लकड़ी के स्रोत की जांच होना अभी बाकी है।
मामले में संतराम वेब्रिज की भूमिका भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि यह स्थान आरा मशीन संचालक संघ से मान्यता प्राप्त है और इसके आसपास लकड़ी की खरीद-फरोख्त की गतिविधियां संचालित होती हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि बाहर से आने वाली लकड़ी को यहां लाकर कम कीमत पर आरा मशीन संचालकों को बेच दिया जाता है। यदि यह जानकारी सही है, तो यह न केवल वन संपदा को नुकसान पहुंचाने का मामला है, बल्कि लकड़ी के परिवहन और व्यापार से जुड़े नियमों के पालन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अलग-अलग जिलों से लकड़ी से भरे ट्रक नियमित रूप से नडियाद पहुंच रहे हैं, तो उनके परिवहन से संबंधित दस्तावेजों और लकड़ी के वैध स्रोत की जांच कौन कर रहा है? क्या वन विभाग और संबंधित अधिकारियों को इस गतिविधि की जानकारी है? यदि जानकारी है, तो अब तक जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि नीलामी में शामिल लकड़ी वैध कटाई से प्राप्त हुई है या इसके पीछे अवैध रूप से पेड़ों की कटाई का मामला है।
वन क्षेत्रों में पेड़ों की अवैध कटाई का असर केवल हरियाली तक सीमित नहीं रहता। इससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास, मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरणीय संतुलन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि अवैध कटाई और लकड़ी की खरीद-फरोख्त पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में इसके गंभीर पर्यावरणीय परिणाम सामने आ सकते हैं।
इस मामले को लेकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों और जागरूक नागरिकों ने जांच की मांग उठाई है। मांग की जा रही है कि वन विभाग संतराम वेब्रिज के आसपास लकड़ी की खरीद-फरोख्त और नीलामी की गतिविधियों की जांच करे। साथ ही, शेहेरा, छोटा उदेपुर और संतरामपुर से आने वाली लकड़ी के स्रोत, परिवहन दस्तावेजों तथा संबंधित व्यापारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जाए। यदि कहीं अवैध कटाई या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें वन विभाग और स्थानीय प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। क्या संतराम वेब्रिज के पास लकड़ी के कारोबार की निष्पक्ष जांच होगी और अवैध कटाई से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी तय की जाएगी, या यह मामला भी शिकायतों तक ही सीमित रह जाएगा?

