वर्ल्ड बैंक की धमाकेदार रिपोर्ट: गरीबी दर घटकर 16.1% हुई, लेकिन टॉप 10% लोग सबसे गरीब लोगों से 13 गुना ज़्यादा कमाते हैं
नई दिल्ली: भारत जहां आर्थिक मोर्चे पर इतिहास बना रहा है, वहीं असमानता की गंभीर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। वर्ल्ड बैंक की जारी एक बहुत ही अहम और चौंकाने वाली रिपोर्ट से पता चला है कि भारत ने पिछले एक दशक में गरीबी हटाने के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। 2011 से 2023 के बीच के समय में, भारत ने कुल 496 मिलियन (496 मिलियन) लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में बड़ी सफलता हासिल की है, जो ग्लोबल लेवल पर एक बड़ा रिकॉर्ड है। गरीबी दर में ज़बरदस्त कमी: 57.7% से घटकर 16.1% हुई
वर्ल्ड बैंक के डेटा के मुताबिक, 2011 में भारत में गरीबी दर 57.7% थी, जो 2023 में घटकर 16.1% हो गई है। सरकारी स्कीम, आर्थिक विकास और सबसे निचले लेवल तक फ़ायदे पहुँचने की वजह से करोड़ों लोगों को दो जून की रोटी और बेसिक सुविधाएँ मिल रही हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को काफ़ी बढ़ावा मिला है।
एक बड़ी चिंता: इनकम में असमानता और अमीर-गरीब के बीच का अंतर वैसा ही बना हुआ है
एक तरफ़, गरीबी कम हो रही है, लेकिन देश में आर्थिक असमानता अभी भी एक गंभीर चिंता का विषय है। वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में इनकम का बंटवारा असंतुलित है:
देश के टॉप 10% सबसे अमीर लोग सबसे गरीब 10% लोगों से 13 गुना ज़्यादा कमा रहे हैं।
अमीर और अमीर होते जा रहे हैं जबकि ज़मीनी स्तर पर मौजूद वर्ग अभी भी संघर्ष कर रहा है। देश के 57% गरीब उत्तर प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक के इलाके में रहते हैं।
रिपोर्ट में ज्योग्राफिकल असमानता पर भी रोशनी डाली गई है। भारत की कुल गरीबी का एक बड़ा हिस्सा, यानी लगभग 57% गरीब, उत्तर प्रदेश से पश्चिम
बंगाल तक के ज्योग्राफिकल इलाके में रहते हैं। इन इलाकों में सोशियो-इकोनॉमिक डेवलपमेंट की रफ़्तार तेज़ करना ज़रूरी है।
भारत ने गरीबी खत्म करने की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है, लेकिन पॉलिसी बनाने वालों को अब इनकम की असमानता खत्म करने पर खास ध्यान देना होगा ताकि देश के हर नागरिक तक आर्थिक खुशहाली बराबर पहुंच सके।

