विशेष संवाददाता, नई दिल्ली : राजधानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक हिन्दू महासभा भवन में उस समय आध्यात्मिक चेतना और अभूतपूर्व उत्साह का संचार हो गया, जब श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के मुख्य संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री, परम तपस्वी पूज्य श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज का शुभागमन हुआ। उनके आगमन को लेकर पूरे परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था। जैसे ही पूज्य महाराजश्री का वाहन भवन प्रांगण में पहुँचा, उपस्थित जनसमुदाय और कार्यकर्ताओं ने गगनभेदी जयघोष और पुष्पवर्षा से पूरे वातावरण को गुंजायमान कर दिया।
वैदिक रीती-रिवाज और ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ ऐतिहासिक अभिनंदन
अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि नंद गिरि जी महाराज तथा जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज अपने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ काफी समय से पूज्य गुरुदेव की प्रतीक्षा कर रहे थे। महाराजश्री के पहुँचते ही वैदिक बटुकों द्वारा उच्चारित मन्त्रों, छत्र और पुष्पमालाओं के साथ उनका भव्य नागरिक अभिनंदन किया गया।
भवन में प्रवेश करते ही पूज्य श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज ने सर्वप्रथम परिसर में स्थापित ऐतिहासिक शिव मंदिर ‘श्री चक्रेश्वर हिन्देश्वर महादेव’ का विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अर्चन किया। इस दौरान उपस्थित सभी संतों एवं श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर राष्ट्र कल्याण की कामना की। इसके पश्चात स्वामी चक्रपाणि महाराज एवं संत समाज ने पूज्य महाराजश्री को भगवा वस्त्र धारण कराकर, पुष्पमालाएं अर्पित करते हुए गुरु पूजन व संत सत्कार की परंपरा निभाई।
भवन भ्रमण और राष्ट्र चिंतन: महापुरुषों के योगदान पर चर्चा
इसके उपरांत जगद्गुरु स्वामी चक्रपाणि महाराज ने पूज्य श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज को संपूर्ण हिन्दू महासभा भवन का भ्रमण कराया और अपने विशेष कक्ष में उनका आदर-सत्कार किया। यहाँ संतों के बीच घंटों तक गहन राष्ट्र चिंतन, धर्म चिंतन, गौ रक्षा और सनातन संस्कृति के संवर्धन पर विस्तृत चर्चा हुई।
चर्चा के दौरान पूज्य श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज ने हिन्दू महासभा के गौरवशाली इतिहास और इसके महापुरुषों द्वारा दिए गए बलिदानों को याद किया। उन्होंने स्वामी चक्रपाणि महाराज के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस प्रकार स्वामी जी ने श्री राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के लिए न्यायालय में लंबी कानूनी लड़ाई लड़कर हिन्दुओं को ऐतिहासिक विजय दिलाई, वह इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है।
दिल्ली में आयोजित होगा समस्त अखाड़ों का विशाल वैदिक अनुष्ठान
बैठक के दौरान पूज्य श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज ने स्वामी चक्रपाणि जी को सुझाव दिया कि राष्ट्र को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करने हेतु दिल्ली (इन्द्रप्रस्थ) स्थित हिन्दू महासभा भवन पर एक भव्य वैदिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाए, जिसमें देश के सभी प्रमुख अखाड़ों के पूज्य संत-महात्मा शिरकत करें।
स्वामी चक्रपाणि महाराज ने इस सुझाव को सहर्ष स्वीकार करते हुए तत्काल घोषणा की कि राष्ट्र को सशक्त बनाने और विश्व शांति के उद्देश्य से शीघ्र ही इस विशाल वैदिक अनुष्ठान का आयोजन किया जाएगा। इसमें सभी अखाड़ों के महामंडलेश्वर, श्रीमहंत और संत समाज एकत्र होंगे।
स्वामी चक्रपाणि महाराज ने जताया आभार
स्वामी चक्रपाणि महाराज ने इस अवसर पर कहा, “पूज्य श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज एक ऐसे सिद्ध, कर्मनिष्ठ और तपोनिष्ठ संत हैं, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन अखाड़ों की व्यवस्था और सनातन धर्म के पुनरुत्थान के लिए समर्पित कर दिया है। वे समाज के हर वर्ग को साथ लेकर सनातन मार्ग पर आगे बढ़ा रहे हैं। हमने पुस्तकों में महान संतों के गाथाएँ पढ़ी हैं, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से किसी को इतना महान कार्य करते देखना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। महाराजश्री बातें कम और धरातल पर काम अधिक करते हैं। आज का यह दिन हिन्दू महासभा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।”
वाल्मीकि प्रकटोत्सव के बाद पहुँचे थे संत
विदित हो कि मंदिर मार्ग स्थित जगद्गुरु श्री कृष्ण विद्यार्थी नंद गिरि जी महाराज के स्थान पर भगवान वाल्मीकि प्रकटोत्सव का पावन कार्यक्रम आयोजित था। उस कार्यक्रम में पूज्य श्रीमहंत हरि गिरि जी महाराज, श्रीमहंत नारायण गिरि जी महाराज, स्वामी चक्रपाणि महाराज एवं जूना अखाड़े के सचिव स्वामी आनंदेश्वरानंद गिरि जी महाराज एक साथ सम्मिलित हुए थे। वहीं से सभी पूज्य संत सीधे हिन्दू महासभा भवन पधारे थे।
इस गरिमामय अवसर पर पवन कुमार, संतोष कुमार, साध्वी नीरू सहित दर्जनों भक्तों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। संतों के बीच हुई इस महत्वपूर्ण महामंत्रणा के दूरगामी और सुखद परिणाम शीघ्र ही सनातन समाज के सामने आएंगे।

