210 करोड़ के साइबर घोटाले का ‘बैंकिंग नेटवर्क’ ध्वस्त: वडोदरा से 6 मास्टरमाइंड गिरफ्तार, देश भर के ठगों को देते थे ‘सर्विस’
वडोदरा | विशेष संवाददाता : डिजिटल इंडिया के दौर में साइबर अपराधी अब केवल लोगों को ठग ही नहीं रहे, बल्कि बाकायदा एक ‘पैरेलल इकोनॉमी’ (समानांतर अर्थव्यवस्था) चला रहे हैं। गुजरात स्टेट साइबर क्राइम सेल ने वडोदरा में एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो देश भर के साइबर ठगों को पैसे ठिकाने लगाने के लिए ‘बैंकिंग सर्विस’ मुहैया कराता था। इस गिरोह ने अब तक करीब 210 करोड़ रुपये की अवैध हेराफेरी की है। पुलिस ने गिरोह के 6 सदस्यों को दबोचकर उनके पास से ‘डिजिटल डकैती’ का भारी सामान बरामद किया है।
हवाला से भी खतरनाक: ऐसे चलता था 210 करोड़ का खेल
पकड़े गए आरोपी खुद ठगी नहीं करते थे, बल्कि वे ठगों के ‘फाइनेंशियल मैनेजर’ के रूप में काम कर रहे थे।
किराए के बैंक खाते: यह गिरोह गरीब और सीधे-साधे लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाता था और उनका नियंत्रण अपने पास रखता था।
पैसे की लॉन्ड्रिंग: जब देश के किसी हिस्से में कोई साइबर ठगी होती, तो शिकार का पैसा इन्हीं खातों में मंगाया जाता था। इसके बाद ये लोग चंद मिनटों में उस पैसे को दर्जनों अलग-अलग खातों और QR कोड के जरिए घुमा देते थे ताकि पुलिस ट्रेल (सुराग) न पकड़ सके।
छापेमारी में मिला ‘ठगी का जखीरा’
पुलिस ने वडोदरा के अलग-अलग ठिकानों पर दबिश देकर आरोपियों के पास से जो सामान बरामद किया है, वह चौंकाने वाला है:
39 डेबिट कार्ड और 10 अलग-अलग बैंकों के QR कोड।
11 स्मार्टफोन और 1 लैपटॉप (जिससे ट्रांजेक्शन मैनेज किए जाते थे)।
12 चेकबुक और 5 पासबुक।
इंटरस्टेट कनेक्शन: कई सफेदपोशों पर शक की सुई
स्टेट साइबर क्राइम की प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार दुबई और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से भी जुड़े हो सकते हैं। 210 करोड़ की इतनी बड़ी रकम का लेनदेन बिना किसी ‘बड़ी मदद’ के मुमकिन नहीं है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या इस खेल में कुछ बैंक कर्मचारी या स्थानीय एजेंट भी शामिल हैं।
महानगर मेट्रो की चेतावनी: सावधान रहें!
आपका बैंक खाता आपकी निजी संपत्ति है। लालच में आकर अपना खाता या एटीएम कार्ड किसी अनजान व्यक्ति को ‘किराए’ पर न दें। अगर आपके खाते से अवैध लेनदेन होता है, तो मास्टरमाइंड से पहले पुलिस आपके दरवाजे पर दस्तक देगी।

