चुनाव पास आते ही नेताजी के गुलाबी वादे और लुभावने भाषण जनता को करोड़पति बनाने के सपने दिखाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही जनता को खुद ही हकीकत की कड़वी गोली पीनी पड़ती है। BJP की फायरब्रांड नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि देश में चीनी ₹13 प्रति किलो के दाम पर मिलेगी। आज सालों बीत जाने के बाद देश की गृहणियां और आम नागरिक यह सवाल पूछ रहे हैं – ‘नेताजी, वो चीनी ₹13 में कहाँ मिल रही है?’ आज बाजार में चीनी का दाम ₹40 से ₹50 प्रति किलो को पार कर गया है। महंगाई ने देश के आम और मध्यम वर्ग की कमर तोड़ दी है। किचन का बजट बिगड़ गया है, लेकिन चुने हुए नेताओं को अपने पुराने वादे याद नहीं हैं। वादों और ज़मीनी हकीकत के बीच
का यह फ़र्क साबित करता है कि राजनीति में लोगों के साथ कैसा मज़ाक किया जा रहा है।
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ की एक तीखी रिपोर्ट: यह किसका विकास रहा है?
नेताजी के खोखले दावे: चुनाव के दौरान चीनी और महंगाई ₹13 कम करने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। लेकिन सत्ता में आने के बाद लोगों के मुंह से चीनी का स्वाद भी छीन लिया गया है। मंत्री चमकते हैं या किसान?: देश की दुनिया की दौलत, यानी किसान, आज भी अपनी गन्ने की फसल का सही दाम (FRP) पाने के लिए आंदोलन कर रहा है। चीनी मिलें और बिचौलिए कमा रहे हैं, किसान कर्जदार बन रहे हैं और ग्राहक महंगाई की मार झेल रहे हैं। तो फिर सवाल यह उठता है कि पिछले कुछ सालों में विकास सच में किसानों और देश के लोगों का हुआ है या मंत्रियों और अधिकारियों का? घर की महिलाओं का बजट बिगड़ा: चीनी से लेकर तेल, गैस और सब्जियों तक रोज़मर्रा की ज़रूरतों की चीज़ों के दाम आसमान छूने से आम आदमी के लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है। चुनाव के दौरान वोट पाने के लिए किए गए ऐसे वादे अब जनता के लिए सिर्फ़ ‘चुनावी बेतुके वादे’ बनकर रह गए हैं।
‘महानगर मेट्रो न्यूज़’ सीधे सवाल उठाता है कि महंगाई पर मंच से दहाड़ने वाले नेता आज अपने ही पुराने बयानों पर चुप क्यों बैठे हैं? जनता अब जागरूक हो चुकी है और ऐसे खोखले वादों का हिसाब मांग रही है!

