गुजरात की राजनीति में पर्दे के पीछे क्या चल रहा है? कौन से नेता किसकी राजनीतिक ज़मीन खिसका रहे हैं और गांधीनगर के AC कमरों में कौन सी नई आक्रामक रणनीति बनाई जा रही है? एक तेज़, तीखे और विवादित राजनीतिक न्यूज़ आउटलेट ‘पाको गुजरात’ के खास कॉलम ‘गांधीनगर की हलचल’ में आपका स्वागत है। गांधीनगर के सेक्रेटेरिएट, स्वर्णिम कॉम्प्लेक्स और पार्टी ऑफिस की गलियों में हाल ही में एक ही चर्चा ज़ोर पकड़ रही है—’चैतर वसावा फैक्टर’ और BJP का कथित राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक। BJP हाईकमान युवाओं के गुस्से और दक्षिण और मध्य गुजरात के आदिवासी इलाके में चैतर वसावा की बढ़ती पकड़ को लेकर बहुत गंभीर हो गया है। चैतर वसावा को घेरने और आदिवासी वोट बैंक में टकराव रोकने के लिए BJP जो नई स्ट्रैटेजी अपना रही है, वह सिर्फ़ नर्मदा, भरूच या छोटा उदयपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गांधीनगर की कैबिनेट कुर्सियों में भी सुनी जा रही है।
क्या मौजूदा मंत्रियों और नेताओं का पत्ता कटेगा?
सेक्रेटेरिएट के गलियारों की सुनें तो चर्चा यह है कि BJP अपने पारंपरिक वोट बैंक, जिसमें आदिवासी इलाके भी शामिल हैं, को बचाए रखने के लिए पूरे राज्य में बड़ा राजनीतिक उलटफेर करने की तैयारी में है। परफॉर्मेंस मेट्रिक्स और ग्राउंड रिपोर्ट: हाईकमान के इंटरनल सर्वे में उन सभी नेताओं या मंत्रियों का ‘रिपोर्ट कार्ड’ तैयार किया गया है जो अपने इलाकों में असर खो रहे हैं, जिनकी इमेज नेगेटिव हो गई है या जो विपक्ष के आक्रामक नेताओं के सामने फ्लॉप साबित हुए हैं। नो-रिपीट थ्योरी का नया अवतार: चर्चा यहाँ तक हो गई है कि आने वाले विधानसभा चुनावों में कई असरदार मंत्री और सीनियर MLA अपना टिकट भूल सकते हैं। पार्टी हाईकमान पुराने जोगियों की जगह नए, युवा और पॉपुलर चेहरों को लाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। टिकट सिर्फ़ ‘जीतने की काबिलियत’ के आधार पर तय होंगे।
‘गांधीनगर की उथल-पुथल’ का सुलगता राज़:
पॉलिटिकल चर्चाएँ यहाँ तक पहुँच गई हैं कि BJP ने चैतर वसावा का पॉलिटिकल कद कम करने के लिए अपने ही लोकल पुराने नेताओं को साइडलाइन करने का प्लान बनाया है। विपक्षी नेताओं की घेराबंदी के बीच, सत्ताधारी पार्टी के अपने ही कुछ मंत्रियों और पूर्व MLA के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। यह बात, जो एक कान से दूसरे कान तक चल रही थी, अब सेक्रेटेरिएट की चाय की केतली से लेकर रीजनल ऑफिस के हॉल तक खुलेआम होने लगी है। मंत्रियों के बीच यह कानाफूसी है कि अगर आदिवासी इलाकों के समीकरण सुधारने के लिए कोई बड़ा बदलाव हुआ, तो सबसे पहले उनका नाम कटेगा। अब देखना यह है कि BJP का यह मास्टरस्ट्रोक विपक्ष के आक्रामक मूवमेंट को हरा पाता है या अपनी ही पार्टी के सीनियर नेताओं में नाराज़गी का धमाका करता है! इस पॉलिटिकल खींचतान और पर्दे के पीछे के खेल की पल-पल की खबरों के लिए ‘पाको गुजरात’ पढ़ते रहें।

