छोटा उदयपुर जिले में एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई है, जैसे यह गांधीनगर में बैठे सरकारी अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के लिए नए-नए एक्सपेरिमेंट करने की खुली लैब बन गया हो। राज्य के आखिरी छोर पर बसे इस आदिवासी इलाके के विकास के लिए दिए गए बजट और स्थानीय नागरिकों के खून-पसीने की कमाई का प्रशासन और नगर पालिका के अधिकारी खुलेआम गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। शिक्षा का लेवल सुधारने के बड़े-बड़े दावों के बीच, लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से कंटेनर स्कूल बनाकर कौन सी प्राइवेट एजेंसियां अपनी जेबें भर रही हैं, यह सवाल अब और ऊंचे लेवल पर पहुंचना बेहद जरूरी हो गया है।
बिना ड्राइवर के धूल फांक रही स्वीपर मशीन: सरकारी पैसे की बर्बादी का एक बड़ा उदाहरण
छोटा उदयपुर नगर पालिका की लापरवाही और बिना प्लान के प्रशासन का एक बड़ा उदाहरण जनता के पैसे से खरीदी गई रोड स्वीपर मशीन है। लाखों रुपये खर्च करके मशीन खरीदी गई, लेकिन इसे चलाने के लिए सही ड्राइवर या ऑपरेटर रखने की कोई कोशिश नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि यह महंगी मशीन आज एक कोने में धूल फांक रही है। अगर सफाई के नाम पर खरीदी गई मशीनें धूल फांक रही हैं, तो लोगों की सुविधा के नाम पर दी गई ग्रांट का इस्तेमाल कहां हो रहा है, यह जांच का बड़ा विषय है।
नगरपालिका और अधिकारियों की मिलीभगत: सूत्रों का सनसनीखेज खुलासा
कई अंदरूनी सूत्रों से मिली चौंकाने वाली जानकारी के मुताबिक, नगर पालिका के अधिकारियों और सरकारी अधिकारियों के बीच एक खास सांठगांठ (मिलीभगत) काम कर रही है। फर्जी और कागजों पर प्रोजेक्ट मंजूर करवाकर बिल पास करवाने और बड़े-बड़े एडमिनिस्ट्रेशन करवाने की पॉलिसी बेलगाम हो गई है। स्थानीय लोग सड़क, पानी और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं और भ्रष्टाचारियों की तिजोरियां लगातार भर रही हैं।
क्या गांधीनगर तक यह बात पहुंचेगी कि भ्रष्टाचारियों को बेलआउट मिलता रहेगा?
हर बेकार, नामुमकिन और कागजों पर आधारित प्रोजेक्ट का ठीकरा सिर्फ छोटा उदयपुर के सिर क्यों फोड़ा जा रहा है? क्या यह ज़िला और इसके लोग सिर्फ़ अफ़सरों के लिए कमाई का ज़रिया बन गए हैं? अब समय आ गया है कि चीफ़ मिनिस्टर ऑफ़िस और संबंधित विजिलेंस डिपार्टमेंट इस मामले को गंभीरता से लें। छोटा उदयपुर में कंटेनर स्कूलों के नाम पर हुए कॉन्ट्रैक्ट, नगर पालिका और पूरे एडमिनिस्ट्रेशन की ख़रीदारी की जांच के लिए एक हाई-लेवल जांच कमेटी बनाई जानी चाहिए। अगर ऐसी सख़्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह साबित हो जाएगा कि इस भ्रष्टाचार को सिस्टम के बड़े अधिकारियों का समर्थन हासिल है।

